परमात्मा की साक्षात विभूति है प्रकृति : हरि चैतन्य पुरी महाराज

जबलपुर दर्पण। जन्म देने वाली मां से अधिक हम सभी प्रकृति के सनिध्य मे रहते है। भारत मे मातृ प्रधान संस्कृति है । परमात्मा, महात्मा, आत्मा, गौमाता, गायत्री माता, सभी मे मां है, लेकिन ये सभी मांऐ आज संकट है ।
प्रदूषण मुक्त नही कर सकते तो प्रदूषित ना करे।
श्रीकृष्ण ने पेड पौधो गौ नदी के साथ पहाड को भी पूजन के साथ शुध्दि करण का आवाहन किया है।
पेडो, नदियो को दूषित हम करते है और स्वच्छ करने के लिए
प्रकृति मे वृक्षो को संरक्षित करने से जीव वृक्ष के समान परोपकार करते हुए संपूर्ण जगत मे हरा भरा हो जाता है। नर्मदा के दर्शन मात्र से सारे संताप दूर होते है, संत महात्माओ के साथ तीर्थ मे प्रकृति के संरक्षण के लिए किया कार्य जीवन को सफल कर देता है। सनातन धर्म मे जल जंगल जमीन नदी पहाड सभी पूज्य है। उक्त ओजपूर्ण प्रेरक उदगार हरि कृपा पीठाधीश्वर हरि चैतन्य पुरी महाराज, नरसिंहपीठाधीश्वर डा नरसिंह दास महाराज ने नर्मदा तट सिध्दा घाट कुलौन शहपुरा मे नर्मदा धर्म सभा मे वृक्षारोपण कर कहे।
इस अवसर पर श्याम साहनी, अशोक मनोध्याय, लकी भटिया, ठाकुर सुभाष सिंह, विनोद आनंद,
रणधीर सिंह, महेन्द सिंह, लोकराम कोरी, राजेन्द्र प्यासी , डा संदीप मिश्रा, विध्येश भापकर, सहित शहपुरा,कुलौन, पाटन जबलपुर के साथ ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
पूजन अर्चन आचार्य संजय शास्त्री, प्रवीण चतुर्वेदी,
नरसिंह मंदिर सिध्दा घाट कुलौन मे महाराज जी सहित श्रृध्दालुओ ने वृक्षो का रोपण कर मां नर्मदा की पूजन अर्चन कर आरती की।



