संतों ने हरियाली अमावश्या को पौधारोपण का संकल्प लिया

जबलपुर दर्पण। सिहोरा तहसील के ग्राम मोहसाम में आयोजित यज्ञ एवं संत समागम के पावन अवसर पर जबलपुर संत मण्डल के कोतवाल महंतश्री रामदास महाराज ने यज्ञानुष्ठान कर मण्डल के सन्त, महंत, महामण्डलेश्वरों को आमंत्रित कर यज्ञ समापन के अवसर पर ऋषि-पूजन का आयोजन किया एवं उपस्थित सभी संतों का पूजन किया। इस अवसर पर एकत्रित संतों ने नृसिंह मंदिर जबलपुर के नृसिंह पीठाधीश्वर एवं गीताधाम ग्वारीघाट के महंत स्वामी नरसिंह दास महाराज के निर्देशन एवं संयोजकत्त्व में संत सभा हुई जिसमें महंत रामजीशरण महाराज ,महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि मध्यप्रदेश गो संवर्द्धन बोर्ड की कार्यपरिषद् के अध्यक्ष),विश्व हिन्दू परिषद् के भोपाल क्षेत्र के धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख मुन्ना पाण्डेय ने सन्त महिमा का उल्लेख किया एवं उपस्थित संतों का परिचय रखा। भारतीय संस्कृति का मूल स्वर सामाजिक समरसता है विषय पर स्वामीअखिलेश्वरानंद गिरि ने अपने पारम्परिक, शास्त्रीय एवं सामाजिक मान्यता पर आधारित विचार व्यक्त किये। स्वामी श्री नरसिंह दास जी ने संत महिमा सहित, भारतवर्ष की संस्कृति और संस्कारों का आधार देवपूजन, ऋषि पूजन, देव यजन एवं यज्ञ पर अपने विचार रखते हुये पर्यावरण संरक्षण एवं पौधारोपण की उपस्थितों को प्रेरणा दी। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने प्रकृति और पर्यावरण के महनीय पक्ष पर विस्तार से विचार रखते हुये-“वृक्षों के महत्त्व को रेखांकित
किया। उन्होंने पीपल के पेड़ औऋ बृगय के पेड़ की विशेषता बताते हुये कहा-पीपँ के पास प्राणवायु है तो बरगद के पास दीर्घजीवन है। इसकारण इन वृक्षों को न केवल लगाते हैं बल्कि इनका पौधारोपण कर इनका संर ण करते हचये इनका पूजन भघ करते हैं। आम, नीम,बेल, मुनगा,पारिजात, कैथा,अर्जुन,अंजन के पेड़ भिन्न-भिन्न गुणों से महत्त्वपूर्ण औषधीय पेड़ माने गये हैं। यज्ञशाला में संतों ने यज्ञ वेदिका के ,मक्ष वेदमंत्रों के महोच्चार पूर्वक प्रतिज्ञा एवं संकल्प लिया कि- हम पर्यावरण एवं प्रकृति का संरक्षण करेंगे तथा हरियाली अमावश्या के दिन माननीय मुख्यमंत्री जी के पौधारोपण आह्वान को ध्यान में रखकर पौधारोपण कर सफल,सार्थक और प्रभावी बनायेंगे प्रदेश की गोशालाओं में,मठ-मंदिरों के रिक्त परिसर एवं भू-खण्डों में भारी संख्या में पौधारोपण करेंगे एवं जन सामान्य को भी इस पुनीत कार्य करना चाहिए।



