औधोगिक क्षेत्र के विकास हेतु स्थानीय निवेशकों को अपेक्षित सहयोग करें सरकार : तरुण भनोत

जबलपुर दर्पण। औधोगिक विकास की बाँट जोह रहे जबलपुर शहर के अधिकांश इन्डस्ट्रीयल एरिया वीरान पड़े हैं | स्थानीय स्तर पर शिक्षित युवाओं के पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं होने के कारण उन्हे अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार को बेसहारा छोड़कर रोजगार के लिए अन्य शहरों को पलायन होने पर मजबूर होना पड़ रहा हैं | पिछले 18 वर्षों के भाजपा शासन में औधोगिक एरिया को चिन्हित तो किया गया, किन्तु स्थानीय स्तर पर निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए किसी ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण अपेक्षित निवेश को बढ़ावा नहीं दिया जा सका और औधोगिक एरिया अविकसित और गैरजरूरी होती गई | उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने प्रदेश की औधोगिक नीतियों के प्रति उदासीनता को लेकर लगाया हैं |
श्री भनोत ने बताया कि जबलपुर जिलें में लगभग 2 दर्जन से अधिक इंजीनियरिंग एवं अन्य व्यवसायिक शिक्षण संस्थाएं संचालित हो रहे हैं | जिसमे से हर वर्ष हजारों की संख्या में शिक्षित युवा निकालकर रोजी-रोटी की तलाश में भटकते हुए और स्थानीय स्तर पर कोई खास विकल्प उपलब्ध न होने के कारण रोजगार हेतु पलायन करना पड़ता हैं | जबलपुर में सर्वाधिक संभावनाओं के बावजूद भी भाजपा सरकार की विफलताओं और उदासीनता का शिकार जबलपुर के शिक्षित और योग्य युवाओं को होना पड़ रहा हैं |
श्री भनोत ने प्रदेश सरकार कि नीतियों पर सवाल करते हुए बताया कि तत्कालीन केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री स्व. श्री अनंत कुमार के द्वारा 5 जून 2015 को प्रदेश के झाबुआ एवं जबलपुर में उर्वरक कारखाना स्थापित करने की घोषणा की गई थी, किन्तु केन्द्रीय मंत्री के घोषणा को 7 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में अबतक कोई पहल नहीं किया गया हैं | डबल-इंजिन का सरकार चलाने का दावा करने वाली भाजपा अपने ही दिवंगत और वरिष्ठ नेता के घोषणा और आश्वासनों को नजरंदाज कर रही हैं, इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता |
श्री भनोत ने बताया कि जबलपुर जिलें के अंतर्गत हरगढ़ और उमरिया-डूँगरिया औधोगिक एरिया को विकसित किया गया था, किन्तु प्रदेश सरकार द्वारा निवेशकों को अपेक्षित सहयोग और प्रोत्साहित करने हेतु किसी ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लिए जाने के कारण न तो कोई बड़ी कंपनी ही आ सकी और ना ही स्थानीय स्तर पर ही निवेशकों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सका | औधोगिक एरिया कई हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी हैं किन्तु न तो यहाँ पर पूंजीपति आ पाये और नही डेवलप करने के लिए पूंजी आ रही हैं | यदि राज्य सरकार स्थानीय निवेशकों को अपेक्षित सहयोग और ठोस नीतिगत निर्णय लेती है तो यहाँ बड़े उद्धोग भी स्थापित होंगे और स्थानीय स्तर पर बेरोजगार एवं शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार भी मिल सकेगा साथ ही औधोगिक निवेश में भी इजाफा होगा |



