कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में कटौती का आदेश

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर याचिका पुष्पा बाथरी विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन में माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नंदिता दुबे में आवेदक के पक्ष में फैसला दिया है कि पदोन्नति से इनकार करने वाले कर्मचारियों को दुसरी व तीसरी क्रमोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा किया गया तो शासन को 9% ब्याज सहित एरियर का भुगतान करना होगा व जो राशि शासन द्वारा याचिकाकर्ता से रिकवरी की है वह ब्याज सहित वापस करे।
आवेदिका सहायक शिक्षक के पद से सेवा निवृत 2021मे हुई थी। शासन द्वारा याचिकाकर्ता को दूसरी व तीसरी क्रमोनति का लाभ दिया गया था लेकिन शासन द्वारा क्रमोनती वापस ले ली गई थी। और कहा गया था की जिसने पदोनति का परित्याग किया था। उसे क्रमोनति का लाभ नही दिया जाएगा। माननीय न्यायालय ने यह आदेश पारित किया कि कर्मचारी अगर पदोन्नति का लाभ नहीं लेता तो उसे क्रमोन्नति के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
आवेदक का पक्ष न्यायालय के समक्ष एडवोकेट जितेंद्र आर्य ने रखते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता सहायक शिक्षक के पद पर लगातार 32 वर्षों से कार्यरत है। तथा याचिकाकर्ता 2021मे सेवा निवृत हुईं हैं।वह द्वितीय व तृतीय क्रमोन्नति की पात्रता रखती है एवं उसे उसका लाभ दिया जाना चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारी बैतूल के आदेश वो कर्मचारी जो पदोन्नति का लाभ नहीं लिए उन्हें क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया जा सकता। इस आदेश से कर्मचारियों को द्वितीय व तृतीय क्रमोन्नति के लाभ से वंचित कर दिया गया था।
कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में कटौती का आदेश जारी करते हुए उसके वेतन से राशि कटौती करने का भी आदेश जारी कर दिया गया था, जो कि विधि विरुद्ध है। अधिवक्ता के तर्क सुनने के पश्चात माननीय न्यायालय ने यह पाया कि क्रमोन्नति कर्मचारी के सेवा शर्तों में उल्लेखित है। अतः उसका लाभ दिया जाना आवश्यक है। न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं अन्य को आदेशित किया है कि याचिकाकर्ता महिला शिक्षक को 2 महीने के अंदर क्रमोन्नति का लाभ प्रदान किया जाए। यदि शासन द्वारा समय सीमा में क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया गया तो 9% ब्याज की दर से एरियर का भुगतान करना होगा।



