शिक्षा एवं मानवता की मिसाल थे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

जबलपुर दर्पण। डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम विचार मंच ने उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर कटँगी दरगाह में पेश की चादर, साथ ही प्यारे मुल्क हिंदुस्तान की अम्न शांति खुशहाली और तरक्की के लिए दुआएं मांगी, संस्था अध्यक्ष सरताज मंजिल ने बताया के आज़ाद हिंदुस्तान के इतिहास में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ऐसे मुस्लिम हुए हैं जिन्हें पूरा भारत सम्मान देता है,, जब तक वो इस दुनिया में थे, उनको पूरा मुल्क अपनी आँखों का सितारा बनाए हुए था और उनके इस जहां से रुख़्सत हो जाने के बाद पूरी शिद्दत से याद करता है और बड़े अदब से उनका नाम लेता है।
आख़िर उनमें ऐसा क्या था जिसकी वजह से उन्हें इतना आला मुक़ाम मिला, पद्म भूषण फिर पद्म विभूषण और फिर भारत रत्न से नवाज़ा गया, भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने, यह सब एक दिव्य स्वप्न सा लगता है, मगर कलाम साहब ने अपनी और सिर्फ़ अपनी सादगी, मानवता, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्रप्रेम से वशीभूत भाव से इस दिव्य स्वप्न को साकार कर दिखाया, मिसाइल मैन के नाम से उनके बारे बहुत कुछ लिखा जा चुका है, बचपन से लेकर आख़री सफ़र तक सबके सामने खुली किताब जैसा है, लेकिन उन्होंने जिस तरह की दीनदार ज़िन्दगी जी थी वह भी उनको महान बनाती है।



