जय शिवाजी, जय भवानी उद्घोष के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई

जबलपुर दर्पण।हिन्द स्वराज के संस्थापक, परम प्रतापी योद्धा,हिन्दू ह्रदय सम्राट,अद्भुत साहस व शौर्य के प्रतीक, कुशल प्रशासक और धर्म के प्रति समर्पित छत्रपति शिवाजी महाराज जी की 394 वी जयंती के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनो आरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में शिवाजी महाराज के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर हिन्दू साम्राज्य दिवस मनाया गया,साथ ही आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ित मरीजों को शिवाजी महाराज के गौरवपूर्ण जीवन के विषय में बताया गया कि किस प्रकार शिवाजी महाराज जी ने अपने शौर्य, कुशल नेतृत्व, कूटनीति और पराक्रम के बल पर हिन्दू साम्राज्य की आधारशिला रखी.हम सभी को सनातन हिन्दू धर्म के रक्षक वीर शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और नशा मुक्त होकर राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए. आश्रम संचालक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार ने बताया कि भारत के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा सम्राट थे, जिनकी शौर्यगाथा इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। शिवाजी महाराज की वीरता की मिसाल महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में दी जाती है और गर्व व ऊर्जा के साथ उनका नाम लिया जाता है। वह एक देशभक्त, कुशल प्रशासक और साहसी योद्धा थे। मुगलों को परास्त करने वाले शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में हुआ था। वहीं उनकी मृत्यु 3 अप्रैल 1680 में हो गई थी। अपने राष्ट्र को मुगलों के चंगुल से बचाने और इसे मजबूत बनाने के लिए शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी। जितने ओजस्वी शिवाजी खुद थे, उतने ही ऊर्जावान उनके विचार भी थे।शिवाजी महाराज बचपन से ही उस युग के वातावरण और घटनाओं को भली-भांति समझने लगे थे। उनके हृदय में स्वाधीनता की ज्वाला जल उठी। उन्होंने कुछ स्वामिभक्त साथियों को संगठित किया। उस समय देश में मुगल आक्रमण अपने चरम पर था। वह महाराज शिवाजी ही थे जिन्होंने मुगलों के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंका था। उन्होंने महज 15 साल की उम्र में अपनी जान की परवाह किए बिना मुगलों पर हमला कर दिया। इस हमले को गुरिल्ला युद्ध की नीति कहा गया।


