प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर समन्वय से कृषि होगी बेहतर

- डॉ. धीरेन्द्र खरे
जबलपुर दर्पण। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि महाविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पोषित ‘‘सेंटर आफ एडवांस फैकेल्टी‘‘ (काफ्ट) ट्रेनिंग के अंतर्गत ‘‘प्राकृतिक खेती चुनौतियां एवं अवसर‘ विषय पर आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण का भव्य समापन हुआ। इसमें 5 राज्यों के कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेंद्र खरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती भारत में कृषि का भविष्य है। प्राकृतिक खेती को कृषि वैज्ञानिक विज्ञान के साथ जोड़कर इसके सार्थक परिणाम प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगे तो भविष्य में कृषि संतुलित व समन्वित होगी। डॉ. खरे ने कहा कि यह 21 दिवसीय प्रशिक्षण विभिन्न राज्यों से आये कृषि वैज्ञानिकों के लिये प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कार्य करने हेतु वरदान साबित होगी। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती के सभी आयामों पर पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने मृदा विज्ञान विभाग के सभी वैज्ञानिक,विशेषज्ञांे को प्रशिक्षण के सफल आयोजन करने हेतु करने के लिये भूरि-भूरि प्रशंसा भी की।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि संचालक प्रक्षेत्र डॉ. दीप पहलवान ने प्राकृतिक खेती के महत्व और कृषि पाठ्यक्रमों में भी इसे शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने के लाभों पर प्रकाश डाला।
21 दिवसीय प्रशिक्षण की पूर्ण जानकारी सी.ए.एफ.टी. संचालक एंव मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एन.जी. मित्रा द्वारा दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ट वैज्ञानिक डॉ. शेखर सिंह बघेल एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एच. के. राय, प्रमुख वैज्ञानिक द्वारा किया गया। डॉ. एन.जी. मित्रा सी.ए.एफ.टी संचालक द्वारा बताया गया कि मृदा विज्ञान विभाग में इस प्रकार का प्रशिक्षण लगातार विगत 30 वर्षो से प्रति वर्ष होता आ रहा है एवं यह 35वाँ प्रशिक्षण था, जिसमें विभिन्न विषयों के 5 राज्यों, आंध्रप्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात़ एवं मध्यप्रदेश के प्रशिक्षणाथर््िायों ने भाग लिया। इस दौरान सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक व्याख्यान दिये गये। प्रशिक्षण के दौरान भारत के विभिन्न कृषि वि.वि. एवं संस्थाओ के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिको द्वारा प्राकृतिक खेती विषय पर उपयोगी जानकारी साझा की गई। साथ ही कृषि कार्य हेतु भूमि में उपयोगी सूक्ष्म जीवों की महत्ता, जैविक खेती, संतुलित खाद का प्रयोग, प्राकृतिक संसाधनो का टिकाऊ उपयोग एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों, मृदा का सही व संतुलित उपयोग विषयांे पर व्याख्यान दिये गये एवं शैक्षणिक भ्रमण के दौरान जबलपुर की जैव विविधता एवं प्राकृतिक खेती को जानने हेतु भेड़ाघाट, बरगी डेम, राष्ट्रीय खरपतवार अनुसंधान केन्द्र, औषधीय उधान, सीड म्यूजियम, जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र डिण्डोरी, अमरकंटक एवं अन्य प्राकृतिक स्थानों का भ्रमण कराया गया।
इस 21 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. एम. मोहन आंध्रप्रदेश, डॉ. सुशील कुमार उत्तरप्रदेश एवं डॉ. रजनी शर्मा मध्यप्रदेश ने अनुभव साझा किये। साथ ही एक परीक्षा को आयोजित किया गया। जिसमंे क्रमशः डॉ. राजीव शर्मा पंजाब (प्रथम), डॉ. पंकज रमेश भाई गुजरात, (द्वितीय) एवं डॉ. आर. पी. अहिरवार मंडला, (तृतीय) को पुरूस्कार अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र खरे द्वारा प्रदान किये गये।
समापन अवसर पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण के समन्वयक डॉ. शेखर सिंह बघेल को उत्कृष्ट कार्यो हेतु मुख्यअतिथि डॉ. धीरेन्द्र खरे ने सम्मानित किया। साथ ही श्री बबलू यदुवंशी एवं श्री राजकुमार काछी को बेहतर कार्यो हेतु प्रशंसा पत्र के साथ सम्मानित किया गया। समापन के दौरान ट्रेनिंग के कम्पेडियम, प्रेक्टिकल मेनुअल एवं प्रोड्क्ट प्रोफोइल ऑफ जवाहर जैव उर्वरक का विमोचन एवं सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के डॉ. एन.जी. मित्रा, डॉ. पी.एस. कुल्हाऱे, डॉ. ब्रजेश दीक्षित, डॉ. एच.के. राय, डॉ. बी.एस. द्विवेदी, डॉ. ए.के. उपाध्याय, डॉ. आर.के. साहू, डॉ. जी. एस. टैगोर, डॉ. एफ.सी. अमूले, डॉ. अभिषेक शर्मा,श्री बबलू यदुवंशी, श्री राजकुमार काछी आदि का सक्रिय योगदान रहा।



