ये कैसी किसान हितेषी सरकार..!

मटर सस्ता होने पर ही पाटन मंडी में खरीदी संभव:मंडी सचिव
पाटन नप्र/जबलपुर दर्पण। जिले की पाटन तहसील की कृषि उपज मंडी में हो रही अनियमितता से किसान इस समय भारी नाराज चल रहा है। पाटन कृषि उपज मंडी की अव्यवस्थाओं से परेशान तहसील के किसानों का कहना हैं कि मंडी में अपनी उपज बेचने आने पर न तो किसान को शुद्ध पेयजल नसीब हो रहा है न ही किसानों को रात रुकने, खाने पीने और निस्तार की बेहतर व्यवस्था है। फिर भी सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा बताया जाता है प्रदेश की सबसे बेहतर कृषि उपज मंडी पाटन है। विधायक अजय विश्नोई हमेशा बताया करते है कि पाटन कृषि उपज मंडी मप्र की सर्वश्रेष्ठ मंडी है। जबकि यहां सब विपरीत देखने को मिलता है यहां अपनी फसल बेचने आने वाले किसानों के साथ व्यापारियों का व्यवहार ठीक नहीं हैं न ही मंडी प्रशासन के द्वारा किसानों के लिए कोई व्यवस्था की गई है। किसान अपनी उपज लेकर जब मंडी में पहुंचता है तो न ही किसान के लिए मंडी परिसर में शुद्ध पानी की व्यवस्था है और न ही किसानों के रात रुकने की व्यवस्था है। उपज बेचने के बाद तुलवाने के लिए बोरिया भरने एवं बोरी सिलने के लिए,बोरी का मुंह खुद किसान को पकड़ना पड़ता है। जबकि हम्माली की राशि व्यापारियों के द्वारा किसानों से पूरी ली जा रही है। यह सब परेशानी सिर्फ छोटे किसानों जिनके पास एक से लेकर पांच एकड़ तक कृषि भूमि है। क्योंकि यहां के बड़े किसान खुद इतने सक्षम है और बहुत से किसान हितैषी संगठन से जुड़े है जिनके कारण उन सभी के काम मंडी में आसानी से हो जाते है। सारी परेशानी सिर्फ छोटे किसानों को झेलना पड़ती है। जब किसान अपना माल बेचकर व्यापारियों के पास जाता है तब वहां भी उसको लाइन में खड़े रहकर अपनी मेहनत की उपज की राशि घंटो इंतजार के बाद किसान के हाथ में आती है। गल्ला व्यापारी के यहा भी किसान को बैठने की जगह नहीं मिलती और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी मिलता है। किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के बाद भी अपने आपको अपमानित महसूस करता है। ऐसी कई समस्याओं से पाटन का मेहनती किसान जूझ रहा है। पाटन तहसील के मेहनतकश किसानों ने कई बार मंडी प्रशासन को अवगत कराया लेकिन इसके बाद भी व्यवस्थाएं में कोई सुधार नहीं आया।
जब मंडी सचिव से इस सम्बंध में बात की गई तो उनका कहना था कि अभी मेरे परिवार में शादी है जिसके कारण में 2-3 दिन पाटन मंडी आने में असमर्थ हूं वही जब मटर खरीदी के संबंध में बात की तो उनका कहना था कि अभी मटर महगा है जिसके कारण बाहर के व्यापारी मटर कि खरीदारी करने नही आ रहे है। जब मटर सस्ता होगा तब पाटन में मटर की खरीदी शुरू होगी। पाटन के जनप्रतिनिधियों को कृषि उपज मण्डी में आकर देखना चाहिए मटर की खरीदी हो रही है या नही..!



