गजब है पाटन मझौली विधान सभा:फूट डालो,राज करो की राजनीति हावी

विधान सभा चुनावों से पहले एकत्रीकरण पर जोर,
पाटन नप्र/जबलपुर दर्पण। पाटन मझौली विधान सभा के पिछले चुनावों में डिस्पोजल शब्द बड़ा चर्चित रहा था यह शब्द किसने और किसके लिए बोला था विधान सभा के सभी लोग भली भांति परिचित हैं। पाटन की तस्वीर बया करती है। आपस में बिना फूट डाले आज तक कोई बाहरी राजनेता यहां राज नही कर पाया है। इस विधान सभा में प्रमुख रूप से लोधी एवं यादव समाज का दबदबा शुरू से रहा है लेकिन अंग्रेजो की तर्ज पर फूट डालो राज करो की राजनीति जब से इस विधान सभा पर हावी हुई है तब से नफरत समूचे क्षेत्र में हावी है। यदि दोनों समाज एक हो गए इनके बीच की दूरियां खत्म हो गई तो फिर यहां राज करना आसान नहीं होगा यही कारण है इन दोनों समाज के लोगों को आपस में लड़ाकर सत्ता के शिखर पर काबिज होने का यही सबसे आसान तरीका है। यदि हम जातिगत समीकरण की बात करे तो ब्राह्मण, कुर्मी, लोधी, यादव फिर अन्य समाज आते है। लेकिन यदि जातिगत नुकसान की बात करे तो सबसे ज्यादा यदि किसी जाति का नुकसान हुआ है तो शायद हम कह सकते है वह लोधी जाति है। फूट डालो,राज करो की राजनीति करने वालों की मेहरबानी से पता ही नहीं चलता किसके ऊपर कोन सा मामला दर्ज हो गया। आश्चर्य तो तब होता था जब व्यक्ति अपने परिवार के साथ घर में हो और अगली सुबह अखबार की हेड लाइन ये कहे कि पाटन में हुई फायरिंग,या चुनावी रंजिश में झगड़ा हुआ या यू कहे अपने विरोधियों पर काबू पाने के लिए सत्ता की दम पर फर्जी मामलों में फसाकर सत्ता के शिखर पर काबिज होने का सबसे आसान तरीका था। ऐसी सनसनी खेज खबर से सभी का माथा ठनकेगा ही इस सब से किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ सिवाय नफरत फ़ैलाने वालो के, इसी को कहते है फूट डालो,राज करो की राजनीति, हालात बेहद चिंताजनक इसलिए भी है परिवार, नाते रिश्ते, भाईचारा,को चीरती हुई समूचे क्षेत्र में नफरत हावी है। हालात तभी सामान्य होगे जब सभी समझदारी का परिचय देते हुए अपने अहम को छोड़कर नफरत के अधेरे में प्रेम की जोत जलाएंगे। उस दिन नफरत बाटने वालो की दुकानों पर ताला लग जाएगा। मौका परस्त लोगों की घर वापसी हो जाएगी…!


