दान दे नहीं सकते तो बचालो,दान में मिली ट्रस्ट की ज़मीन..!

नाबालिक भगवान के बालिक भक्तों ने कराली बेशकीमती जमीन पर टी.एंड सीपी परमिशन..!
पाटन ब्यूरो/जबलपुर दर्पण। नगर का चर्चित मामला श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट की बेशकीमती प्रॉपर्टी का जिसको नगर के दानवीर स्व हरवंश प्रसाद तिवारी के द्वारा उक्त भूमि मंदिर में लगाई थी जिसकी आय से मंदिर का मेंटनेस एवं पूजा पाठ में लगने वाले धन की व्यवस्था आजीवन होती रहे। शायद ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लालची लोगों की नजर मंदिर की बेशकीमती जमीन पर पड़ गई। ट्रस्ट की जमीन को खुर्द बुदुर्ग करने की नीयत से आनन फानन में तहसील के आला अधिकारियों की मदद से दिनांक 30/09/2021 को ट्रस्टी राजेंद्र सिंह, बगैरा ने 89000 वर्गफुट भूमि एसडीएम कार्यालय भवन के लिए दान दी शेष 48000 वर्गगुट भूमि पर शंकर भगवान का मंदिर एवं पार्क निर्माण करने का खूब प्रचार प्रसार किया। लेकिन बाकी बची भूमि पर राजनैतिक रसूख की दम पर टी.एंड सीपी से प्लाटिंग की गोपनीय तरीके से अनुमति ली गई मजेदार बात यह है कि जब कोई भी कॉलोनाईज़र्स आवासीय कालोनी विकसित करता है तो अनिवार्य रूप से मंदिर एवं उद्यान विकसित करने भूमि आरक्षित करता ही है। लेकिन यहां भगवान का भव्य मंदिर बनाने की बात की जा रही है। शायद श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट के पुराने मंदिर में कोई भी ट्रस्टी एवं माननीय दिया जलाने आज तक नहीं गए होगे एवं ट्रस्ट की उक्त भूमि पर मूल दानदाता के द्वारा दायर प्रकरण मान न्यायालय में विचारदीन है। ऐसा प्रतीत होता है कि शायद उचित लाभ लेकर पाटन राजस्व विभाग, टी.एंड सीपी के आला अधिकारियों के द्वारा सभी को अनुचित लाभ दिलाने ट्रस्ट की भूमि पर प्लाटिंग की अनुमति दी है।
जब टी.एंड सीपी के उपयंत्री से ट्रस्ट की भूमि पर कालोनी विकसित करने की जानकारी के संबंध में बात की गई तो उनका कहना था कि उक्त प्रॉपर्टी पाक साफ है विधायक अजय विश्नोई ने टी.एंड सीपी की परमिशन कराई।
“आखिर क्यों ट्रस्ट के जवाबदार लोगों ने” शपथ पत्र पेश कर पूर्व एवं वर्तमान में चल रहे प्रकरण की जानकारी टी.एंड सी पी से छुपा कर कालोनी विकसित करने की अनुमति ली, क्या शासन प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करेगा या ट्रस्ट की बेसकीमति जमीन पर चुप्पी साध कर षड्यंत्र कारियो की मदद करेगा।
वही इस पूरे घटनाक्रम से पाटन मझौली विधान सभा में निवास करने वाले ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश है।



