केयर अस्पताल को नहीं मिली हाईकोर्ट से कोई राहत

जबलपुर दर्पण। माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनिन्दर एस भट्टी की अदालत द्वारा केयर अस्पताल कटंगी रोड, करमेता को कोई राहत नहीं दी। उल्लेखनीय है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर द्वारा केयर अस्पताल व संस्कारधानी अस्पताल के विरूद्ध प्रशान्त वैश्य द्वारा प्रस्तुत शिकायत की जांच हेतु अजय कुरील व डॉ आदर्श विश्नोई की 2 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी जिसमें जांच कमेटी के द्वारा दिनांक 28/12/2022 को प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में केयर अस्पताल व संस्कारधानी अस्पताल के पंजीयन व लायसेंस को निरस्त करने की अनुशंसा की गई थी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कढ़ी कार्यवाही करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के द्वारा दिनांक 01 फरवरी 2023 को केयर अस्पताल का पंजीयन निरस्त कर अस्पताल को बंद करने का निर्देश दिया गया था। प्रकरण में इंटरवीनर व शिकायतकर्ता विनय जी डेविड व प्रशान्त वैश्य की ओर से अधिवक्ता पारितोष गुप्ता उपस्थित हुए। श्री गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि जांच कमेटी के द्वारा अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि केयर अस्पताल के पास नगर निगम से प्राप्त भवन अनुज्ञा व भवनपूर्णता प्रमाणपत्र और संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से विकास अनुज्ञा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल भवन में वेकल्पिक फायर एक्जिट व साइड/पीछे के हिस्से में विधि निर्धारित 6-6 मीटर रिक्त स्थान तथा 75 वर्गमीटर निर्मित एरिया पर एक कार पार्किंग के हिसाब से पार्किंग स्पेश उपलब्ध नहीं है। अनुज्ञेय एफ.ए.आर अर्थात तल क्षेत्र अनुपात के 30 प्रतिशत से अधिक जगह पर तथा मरीजों की पार्किंग की जगह पर भी अवैध रूप से भवन निर्माण किया गया हैं। केयर अस्पताल द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत की गई ग्राम पंचायत की दिनांक 27/12/2014 की तिथि की भवन अनुज्ञा कूटरचित व फर्जी है क्योंकि इस तारीख के पहले ही ग्राम करमेता नगर निगम की सीमा में शामिल हो गया था। मप्र शासन की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने माननीय न्यायालय को बताया कि मुकदमा न्यायालय में विचारणीय नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता केयर अस्पताल के पास मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर के अस्पताल पंजीयन निरस्ती संबंधी आदेश के विरूद्ध अपील के लिए राज्य शासन के समक्ष अपील दायर करनी थी क्योंकि मप्र रूजोपचार अधिनियम 1973 की धारा 6 की उपधारा 3 के अंतर्गत राज्य शासन अपीलीय अधिकारी है।
सुनवाई उपरांत माननीय न्यायालय के द्वारा यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता को राज्य शासन के सामने अपील प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। चूँकि इंटरवीनर व शिकायतकर्ता विनय जी डेविड व प्रशान्त वैश्य की शिकायत पर की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल का पंजीयन निरस्त किसार गया था। इस तथ्य के दृष्टिगत का इंटरवीनर व शिकायतकर्ता का पक्ष भी उक्त अपील में सुनने का आदेश जारी करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया गया।



