जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

शासकीय शालाओं की राशि निकालना बनीं जटिल समस्या

जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रदेश एवं जिले की शालाओं के शाला प्रधान(प्रधान अध्यापक )द्वारा पूर्व समय में वरिष्ठ अधिकारीयों द्वारा दिए दिशा निर्देशों के अनुरूप अपनी अपनी शालाओं के विभिन्न कार्य जैसे शाला की रंगाई पुताई, पंखे- लाइट फिटिंग,स्टेशनरी खरीदी, आकस्मिक मरम्मत कार्य, विधानसभा डाक,कम्प्यूटर कार्य आदि में शाला प्रधान ने अपनी जेब से राशि खर्च कर दी गयी । अब उस खर्च की गयी राशि को जब निकालने की बारी आयी तो अब शाला प्रधान को ऑनलाइन लेनदेन (खर्च करना ) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि शिक्षक द्वारा पहले शाला संचालन हेतु विभिन्न कार्य करने में सालभर छुटपुट खर्च जैसे शाला प्रवेश उत्सव,जन शिक्षा केंद्र से पुस्तकों का संग्रहण करने अनेकों बार अपना जेब से भाड़ा लगाया गया। अब जबकि वित्तिय वर्ष का अन्तिम समय चल रहा है।बिना कम्प्यूटर के आहरण वितरण का जटिल कार्य कैसे सम्भव हो पायेगा है। यह अपने आप में एक जटिल समस्या है। क्या सालभर वरिष्ठ अधिकारी इस बात से अनभिज्ञ रहें ?
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार यदि वरिष्ठ कार्यालय द्वारा सरलीकरण नहीं किया गया तो समस्त शालाओं की वित्तीय वर्ष २०२२-२३ की समस्त राशि लेप्स हो जायेगी। शाला विकास के कार्य अधूरे रह जावेंगे। साथ ही साथ शाला प्रधान की जेबों के पैसे जो उन्होंने वरिष्ठ कार्यालय के मार्गदर्शन पर खर्च किये वह राशि भी अटक जायेगी। वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि अतिशीघ्र शाला विकास एवं अतिआवश्यक कार्य के भुगतान हेतु पहले की तरह सरलीकरण करें ताकि प्राथमिक,माध्यमिक एवं एकीकृत शालाओं की राशियां लेप्स ना हो पाए।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर,अरविन्द विश्वकर्मा,पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, अफ़रोज़ खान, चंद्रभान साहू,बैजनाथ यादव, भास्कर गुप्ता,ऋषि पाठक,विश्वनाथ सिंह,नितिन तिवारी,अजब सिंह, सुल्तान सिंह,आकाश भील, दुर्गेश खातरकर, इमरत सेन, देवराज, धर्मेंद्र परिहार, समर सिंह, जी आर झारिया, महेश मेहरा,अंजनी उपाध्याय,विष्णु झारिया, राशिद अली, अर्चना भट्ट, रेनू बुनकर, गीता कोल,राजेश्वरी दुबे, सरोज कोल, ब्रजवती आर्मो,भागीरथ परसते, कल्पना ठाकुर,आदेश विश्वकर्मा, डेलन सिंह, आसाराम झारिया इत्यादि ने शाला निधि के विनिमय की विधि का सरलीकरण करने एवं पहले के समान करने को कहा है।

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