स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट का भवन बनकर तैयार किन्तु जिम्मेदारों की उदासीनता से मरीज परेशान – तरुण भनोत

पूर्व वित्त मंत्री के विधानसभा में तारांकित प्रश्न पर लोक निर्माण मंत्री ने दिया जवाब
जबलपुर दर्पण । विदित हो कि जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज परिसर में मध्यभारत का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल के रूप में स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा वर्ष 2013-14 में लोकसभा चुनाव के दौरान किया गया था, किन्तु घोषणा के बाद वर्षों तक इस परियोजना को ना तो पर्याप्त राशि का आवंटन हुआ और ना ही परियोजना के पूरा होने का कोई समय-सीमा निर्धारित किया गया, किन्तु वर्ष 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही बजट वर्ष 2019-20 में इस परियोजना को 20 करोड़ रुपये के बजट एकमुश्त प्रदान किया गया ताकि यह महत्वपूर्ण परियोजना यथाशीघ्र पूरा हों | किन्तु, प्रदेश में सत्ता-परिवर्तन के बाद इस परियोजना को वह गति नही मिल सकी जो वास्तव में चाहिए थी | पिछले 7 महीने से एससीआई का भवन बनकर तैयार हो चुका है लेकिन अभी तक ना तो निर्माण अजेंसी पीआईयू ने भवन का हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी की है और ना ही स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के स्वीकृत स्टाफ की शत प्रतिशत भर्ती शुरू हुई है | उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के प्रति शासन की धीमी चाल को लेकर लगाया गया है |
उल्लेखनीय है कि जबलपुर सहित महकौशल एवं आसपास के जिलों के कैंसर मरीजों को स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट से समुचित उपचार नही मिलने के कारण उन्हे प्रदेश के बाहर इलाज करने के लिए जाना पड़ता है, जिससे उनपर आर्थिक बोझ बढ़ता है और अत्याधिक समय की भी खपत होती है | पिछले 7 महीने से भवन बनकर तैयार खड़ा है लेकिन हस्तांतरण जैसी छोटी-छोटी प्रक्रियाओं में भी महीनों-महीनों लगाये जा रहे है | श्री भनोत ने बताया कि हस्तांतरण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर लोक निर्माण मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने अगले एक महीने में होने की पुष्टि की गई है |
श्री भनोत ने बताया कि स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में कैंसर मरीजों के समुचित उपचार हेतु अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी करने के प्रस्ताव पर लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि लिनीयर एक्सीलेटर मशीन पीपीपी मोड पर क्रय करने की कार्यवाही की जा रही है | स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के लिए स्वीकृत पदों की जानकारी और भर्ती प्रक्रिया के संबंध में पूछे गए सवाल पर लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि प्राध्यापक के 5 पदों में से 4 रिक्त है, सह-प्राध्यापक के 14 स्वीकृत पदों में से 12 रिक्त है, सहा. प्राध्यापक के 14 में से 12, सीनियर रेजिडेंस के 18 में से पूरे 18 पद रिक्त है, स्टाफ नर्स के 72 स्वीकृत पदों में 55 रिक्त है | उन्होंने बताया की लोक निर्माण मंत्री के जवाब के अनुसार स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के लिए कूल 201 पदों में से अलग-अलग विभागों के 161 पद अब भी खाली हैं |



