कोरोना पीड़ित लोकसेवक दोहरी मार के शिकार
जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि कोरोना काल में बीमार अधिकारीयों /कर्मचारियों (लोकसेवकों )ने अपने और अपने परिवारवालों के इलाज में लाखों रूपये खर्च कर दिए। बामुश्किल कुछ भाग्यशाली अपनी जान बचा पाये तो कुछ के परिवार वाले भी सकुशल बच गए।
मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में कोरोना वैश्विक महामारी के दोनों दौर में अनेक अपनों से बिछड़ गए। समुचा परिवार काल के गाल में समा गया। विभीषिका का दंश झेलने वाले अनेक लोकसेवकों ने अपना सबकुछ लुटा दिया।लाखों रुपयों का इलाज करवाकर सुरक्षित बच पाये वे अब दोहरी मार का शिकार हो रहें हैँ। इलाज में खर्च रुपयों को वापिस प्राप्त करने के लिए उन सभी लोकसेवकों ने सारे मेडिकल सर्टिफिकेट, दवाइयों के पर्चे, भर्ती की रसीदें , कराई गयी जांचो के बिल, डॉक्टर्स की पर्चीयां, सी टी स्कैन की रिपोर्ट, कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट और सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जगह नहीं होने पर प्राइवेट में इलाज की अनुमति का पत्र यहाँ तक कि सरकारी अस्पताल में भर्ती और दवाइयाँ प्राइवेट से खरीदकर लाकर इलाज करवाया उसके प्रमाण सबकुछ विधिवत जमा करवा दिये।तब भी उन लोकसेवकों को विगत 3 वर्षों से शासन से इलाज में लगाई गयी राशि वापिस नहीं मिली जिसे मेडिक्लेम कहते हैँ।यदि कुछ लोकसेवकों को मेडिक्लेम मिला भी तो उनके द्वारा इलाज में लगाया गयी पूरी राशि नहीं प्राप्त हुई।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि ये बहुत ही गंभीर एवं संजीदा मामला हैँ क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना से जैसे तैसे जान बचा पाये तो अब कर्ज के बोझ तले दब गए लोकसेवकों की पीड़ा समझने सक्षम अधिकारी तैयार नहीं हैँ अनावश्यक भटका रहें हैँ। हलाकान -परेशान लोकसेवकों में भारी रोष व्याप्त है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर,जी आर झारिया, भास्कर गुप्ता,संजय उपाध्याय, जी आर झारिया, माधव पाण्डेय,ऋषि पाठक,दुर्गेश खातरकर,धर्मेंद्र परिहार,विश्वनाथ सिंह, अफ़रोज़ खान,देवेंद्र राजपूत,रवि केवट, सुरेंद्र परसते,चंद्रभान साहू,शैलेश पंड्या,अजब सिंह, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, नितिन तिवारी,आदेश विश्वकर्मा,आकाश भील, विशाल सिंह,रवि विश्वकर्मा, पंकज हल्दकार,अरविन्द विश्वकर्मा, अरविन्द दीक्षित,आशीष विश्वकर्मा, आशीष यादव, इमरत सेन, समर सिंह,अंजनी उपाध्याय,आदेश विश्वकर्मा, डेलन सिंह,कमलेश दुबे,बैजनाथ यादव,अजय श्रीपाल, विष्णु झारिया, आसाराम झारिया, राकेश मून, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, मदन पांन्द्रो, देवसिंह भवेदी, राजेंद्र प्रधान, दशरथ मरावी, रामदयाल उइके,सतीश खरे,पवन सोयाम, रामकिशोर इपाचे,पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी,अर्चना भट्ट,राजेश्वरी दुबे, रेनू बुनकर,अम्बिका हँतिमारे, ब्रजवती आर्मो, भगीरथ परसते, सरोज कोल, गीता कोल,कल्पना ठाकुर,योगिता नंदवेश्वर, पूर्णिमा बेन,संदीप परिहार, प्रेमवती सोयाम, रौशनी महोबिया, रजनी गुप्ता,वीरेंद्र दुबे,महेश मेहरा, भोजराज विश्वकर्मा,त्रिलोक सिंह, सुधीर गौर, राशिद अली, शायदा खान, शबनम खान,अनुराधा नामदेव, सुमिता इंगले,जागृति मालवीय,मोदित रजक, जीतेन्द्र रजक, ब्रजेन्द्र सिंह,एस बी रजक, आर पी खनाल, संतोष श्रीवास्तव, संतोष चौरसिया, गगन पटेल, गोपी शाह, धनराज पिल्लै, शशिरमन, शहीर मुमताज़, अमर सिंह प्रमोद दुबे, अनिल जैन, बहादुर पटेल, अजय लोधी,मनोज कोल इत्यादि ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं स्थानीय प्रशासन से पत्राचार कर कोरोना पीड़ित लोकसेवकों के इलाज में खर्च रुपयों को जिसे मेडिक्लेम कहते है, शीघ्र अतिशीघ्र प्रदान करने की मांग की है।



