साहित्य दर्पण

सार्थक और सकारात्मक विचारधारा ही सर्वश्रेष्ठ : इंजी. स्वाति

जबलपुर दर्पण। अपने नामानुसार गुण संपन्न है श्रीमती स्वाति। जब हाथ में एक कलम और एक कापी लिये होती है तो पूर्णतया एक देवी दिखती है। शुचिता और निष्ठा की देवी । सोसाइटी की भजन मंडली समिति हो अथवा सुरक्षा एवं रखरखाव की समिति‌ हो हर स्थान पर स्वाति को सभी एकमतेन कोषाध्यक्ष चुनते हैं। आय व्यय रखने मेंं स्वाति का कोई सानी नहीं। सोसायटी के पार्क में बैठे बैठे ही पैसे लेने का और देने का कार्य हाथ में कलम कॉपी लिये तत्काल संपन्न कर देती हैं। स्वाति नाम का अर्थ एक नक्षत्र और विद्या की देवी सरस्वती होता है। सु+अति अर्थात अत्यंत लाभकारी। स्वाति नाम की लड़कियां प्रतिभावान बुद्धिमान सुहृदय और आत्म नियंत्रित होती हैं। ये अप्रतिम अनुपम मिलनसार और प्रभावशाली होती हैं। हमारी सोसाइटी की श्रीमती स्वाति प्रसाद भी शत प्रतिशत ऐसी ही हैं। मृदुभाषी विनम्र और क्रोध जैसे छू न गया हो। कितनी भी विषम या विपरीत परिस्थितियां हो हर पल मुख पर एक स्थाई मुस्कान और हृदय में सभी के प्रति सम्मान लिए रहती हैं।‌ एक बार सोसाइटी के पार्क में सह भागीदारी कर खाना खाने का कार्यक्रम बना। खाना बनाने के लिए हमारी सोसाइटी की सभी महिलाएं बहुत ही तत्पर लगनशील रहती हैं। बहुत ही मनोयोग से खाना बनाती हैं। श्रीमती स्वाति की अगुवाई में पैसा इकट्ठा किया जाने लगा। सोसाइटी की महिलाओं द्वारा बनाया स्वादिष्ट भोजन ग्रहण कर सभी अभिभूत हुए। अब बारी आई आय और व्यय की। जिसका जो प्रति सदस्य अंश आया वो सब अपना-अपना अंश श्रीमती स्वाति को देने लगे । सभी का पैसा जोड़ा गया । तब पता चला कि लगभग ₹900 कम पड़ रहे हैं। अब तो स्वाति के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। मैंने तो पैसा ठीक लिया है पर यह कम कैसे हो गया। चिंतित श्रीमती स्वाति को सांत्वना दी गई कि आप चिंता न करें। सभी सदस्यों की गिनती की गई तो पता चला कि 6 लोग अनुपस्थित थे। पश्चात थोड़ा-थोड़ा और अंश उपस्थित सदस्यों से लिया गया। जब आय और व्यय का हिसाब किताब पूरा मिल गया तो स्वाति की सांस में सांस आई और चेहरे पर फिर वही चिर परिचित मुस्कान आई। इसे कहते हैं निष्ठा उत्तरदायित्व और प्रतिबद्धता। प्रांजलता और ऋजुता की प्रतिमूर्ति आचार और व्यवहार में अग्रगण्या धर्म में पूर्ण विश्वास रखने वाली आस्था से सराबोर स्वाति की उसी स्वभाव जैसी अत्यंत शालीन गुरु सिख मर्यादित गुड्डो नाम की एक बहुत ही प्यारी अंतरंग मित्र है। दोनों ही शाम को गुड्डो के घर पर बैठकर सत्संग करती हैं। एक दिन मेरे पूछने पर श्रीमती स्वाति ने बताया कि हम कभी आध्यात्मिक किताबें लेकर पढ़ते हैं कभी ध्यान में बैठती हैं कभी आपस में प्रभु का मनन चिंतन करती हैं और कभी भजन गीत आदि गाकर प्रभु में लगन लगाती हैं। हमें दुनियादारी की बातें करना अच्छा नहीं लगता है। सरल है सहज है सुशील है सहृदय है शांतचित है कर्मपरायण है मृदुभाषी है निर्मल है क्या नहीं है श्रीमती स्वाति ‌। अंतर्मन में स्नेह और ममता लिए श्रीमती स्वाति और इनकी देवरानी श्रीमती श्रीलता दोनों एक ही परिवार में संग संग रहती हैं। श्रीमती स्वाति अपनी देवरानी श्रीमती श्रीलता को अपनी छोटी बहन और देवरानी श्रीमती श्रीलता अपनी जेठानी श्रीमती स्वाति को बड़ी बहन समझती है‌। जब इनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो किचन में दोनों एक साथ उठकर चल देती हैं। कोई भेदभाव नहीं केवल दोनों में प्यार ही प्यार। एक दिन सुबह सुबह मैं इनके घर में किसी काम के लिए पहुंचा। दोनों ने परस्पर आपस में देखा और किचन की ओर चल दी। श्रीलता डोसा बनाकर ले आई और स्वाति चटनी सांभर। मैंने जब डोसा खाया तो इन दोनों बहनों सम जेठानी देवरानी का प्यार इसमें भरपूर पाया। फिर मैंने दोनों का आभार प्रकट करते हुए साधुवाद किया। श्रीमती स्वाति को किसी के बारे में निंदा करना अथवा सुनना अथवा कहना अच्छा नहीं लगता‌। श्रीमती स्वाति का कहना है की सभी सार्थक और सकारात्मक बात करें। जब मिले तो प्रेम से मिले। छल कपट द्वेष भाव से परे जीना चाहती हैं। इंजी. स्वाति के जीवनसाथी राजा प्रसाद है जो स्वाभव से राजा‌ ही हैं। दोनों एक से बढ़कर एक शालीन मृदुभाषी और मितभाषी हैं। इस आदर्श जोड़ें को सोसाइटी का हरेक रहवासी बहुत स्नेह और सम्मान देते हैं ।

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