विधानसभा में गूँजेगा विधुत ताप गृहों का निजीकरण का मुद्दाः तरुण भनोत

जबलपुर दर्पण। कांग्रेस सरकारों के दौरान देश भर में नागरिक सुविधाओं की दृष्टि से स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और अधोसंरचना विकास जैसे मूलभूत नागरिक अधिकारों के मुद्दों को शासन द्वारा संचालित करने का निर्णय लिया जाता रहा है, ताकि देश और प्रदेश को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में सरकारी शिक्षण, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्र एक तरफ जहां शासन को राजस्व प्रदान करेगा वही नागरिकों को बेहतर और किफायती दर पर सुविधाएं प्रदान की जा सकेंगी, साथ ही इन क्षेत्रों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को भी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा । किंतु, वर्तमान भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा पिछले 8-9 वर्षों में जबरन सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रमों को औने-पौने दाम पर अपने उद्योगपति मित्रों को बेचने पर आमदा है । उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत द्वारा प्रदेश सरकार द्वारा अमरकंटक ताप विद्युत गृह को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव के विरोध में लगाया है । इस संबंध में उन्होंने प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्राचार भि किया गया है |
श्री भनोत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित पत्र के माध्यम से बताया कि स्थानीय समाचार के माध्यम से उन्हें जानकारी लगी है कि शिवराज सरकार द्वारा प्रदेश के अमरकंटक स्थित अमरकंटक ताप विधुत गृह को निजी हाथों में देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि प्रदेश सरकार की ऊर्जा क्षेत्र के सभी उपक्रम प्रॉफ़िट में है | प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रस्ताव के माध्यम से पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट – 2003 के अंतर्गत उल्लेखित नियमों का उल्लंघन कर रही है | वर्तमान में अमरकंटक ताप विधुत, चचई के मामले में मध्यप्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के पर्यावरण स्वीकृति हेतु प्रेषित किए गए प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना किसी जॉइन्ट वेन्चर के माध्यम से नही बनाई जाएगी, उसके बावजूद इस में पर्यावरण मंत्रालय के स्वीकृति की शर्तों का उल्लंघन कर परियोजना में निजी कंपनियों के साथ जॉइन्ट वेन्चर किया जा रहा है |
श्री भनोत ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में बताया कि इस परियोजना हेतु लगभग 247 एकड़ (100 हेक्टेयर) भूमि की आवश्यकता है जो कि मध्यप्रदेश शासन की मध्यप्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के अधीन है, जिसे कलेक्टर रेट पर जॉइन्ट वेन्चर के बाद निजी कंपनी के पक्ष में स्थानांतरित किया जाएगा | किन्तु, भविष्य में किसी कारणवश जॉइन्ट वेन्चर को समाप्त किया गया तो उसी भूमि को बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन के आधार पर प्रदेश सरकार को खरीदना पड़ेगी, जिससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचेगी | उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश शासन के अधीनस्थ विधुत कंपनियों में कार्य कर रहे कर्मचारियों को शासन की सेवा-शर्तों के आधार पर उनके वेतन, भत्ते, पदोन्नति एवं अवकाश आदि सुरक्षित है, किन्तु जॉइन्ट वेन्चर के उपरांत निजी कंपनियों द्वारा मध्यप्रदेश के उत्पादन कंपनियों के सेवानिवृत्त इकाइयों के पदों को समाप्त कर उसी के एवज में नवीन परियोजना हेतु समस्त स्वीकृतियां प्राप्त कर उसके स्थान पर उक्त निजी कंपनी द्वारा नवीन इकाई स्थापित की जाएगी और कर्मचारियों को निजी कंपनी की सेवा-शर्तों के आधार पर इकाई में रखा जाएगा | इससे कर्मचारी हितों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरों में डाला जा रहा है, जो कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट का खुला उल्लंघन है |
उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व भी इस सरकार के दौरान मध्यप्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा सब-स्टेशन, ट्रांसमिशन लाइनों को प्रतिस्पर्धा के माध्यम से निजी हाथों में दिया जा रहा है, जिससे ट्रांसमिशन कंपनी की अधोसंरचना और साख में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है | सरकार द्वारा आसान और किफायती दर पर विधुत प्रदाय किया जाना अतिआवश्यक सेवाओं में से एक है, किन्तु ऊर्जा क्षेत्र में लगातार निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाना और उत्पादन संयंत्रों पर निजी कंपनियों के आधिपत्य जैसे एकतरफा निर्णयों से कहीं न कहीं प्रदेश के 7.5 करोड़ जनता के जेब पर सीधा असर पड़ रहा और प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं अभी भी गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे है, जहां अत्याधिक बिजली बिलों के भुगतान से संबंधित अनेकों शिकायतें प्रतिदिन हम जनप्रतिनिधियों के समक्ष पहुँच रहे है |
श्री भनोत ने सरकार के इस प्रस्ताव पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की सार्वजनिक उपक्रमों को किसी भी कीमत पर निजीकरण करने नही दिया जाएगा, यदि प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को वापिस नही लिया गया तो विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में इस मामले को प्रमुखता से विधानसभा में उठाया जाएगा और विपक्ष सरकार के इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेगी |



