पूर्व वित्त मंत्री ने पीड़ित छात्रों की पूरी फीस के साथ हर्जाने के भुगतान की मांग

जबलपुर दर्पण। प्रदेश की भाजपा सरकार पिछले 18-19 वर्षों से प्रदेश को स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने का दावा कार रही है, किन्तु शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में विफलताओं की तमाम रिकार्ड इस सरकार के दावों और जमीनी हकीकत की पोल चुकी है | प्रदेश शासन की उदासीनता और बेपरवाही के कारण नर्सिंग कॉलेजो में पढ़ रहे लाखों बच्चों का भविष्य बेहद खतरनाक स्थिति में पहुँच चुका है | प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सैकड़ों नर्सिंग कॉलेजो को बिना निर्धारित मापदंड पूरा किए संबंद्धता प्रदान कर दी गई, जिनमे हजारों की संख्या में छात्र-छात्रों ने नर्सिंग के लिए इन फर्जी कॉलेजो में प्रवेश ले लिया | प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजो की संख्या लगभग 600 से अधिक है और इसमे सीधे प्रभावित होने वाले लगभग 50000 से अधिक छात्र है, जिनका एक तरफ जहां कॉलेज ने फीस लेकर आर्थिक दोहन किया वही दूसरी तरफ अब इन बच्चों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हो चुकी है | उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित पत्र के माध्यम से प्रदेश में हजारों नर्सिंग छात्र-छात्रों के साथ हुए अन्याय को लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार पर लगाया है |
श्री भनोत ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में बताया कि प्रदेश में हुए इस नर्सिंग कॉलेजो के फर्जीवाड़े एवं अनिमित्ताओं और शासन की लापरवाही की जांच वर्तमान में माननीय न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा प्रारम्भिक जांच पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सैकड़ों ऐसी नर्सिंग कॉलेज खुले हुए थे, जिनका जमीन पर कोई रिकार्ड नही है, मतलब ना कॉलेज का भवन, ना कोई क्लास रूम है | खाली जमीनों पर नर्सिंग कॉलेज का भवन बताने के भी कई गंभीर मामले सामने आयें हैं और फर्जी शिक्षकों की भर्ती और एक शिक्षक को ही कई कॉलेजो में पढ़ाए जाने का मामला भी आया है साथ ही जांच में एक प्रिन्सपल को ही कई कॉलेजो में प्रिन्सपल की नियुक्त जैसी गंभीर अनिमितताएं सामने आई है |
श्री भनोत ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र के माध्यम से आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताया कि इन फर्जी और तमाम अनिमित्ताओं से भरे नर्सिंग कॉलेजो के छात्रों को शासन द्वारा प्रति छात्र – 33000/- रुपये प्रति वर्ष छात्रों के माध्यम से इन कॉलेज को छात्रवृत्ति भी शासन के खजाने से दिया जा रहा है, और जांच में नर्सिंग कॉलेज का कोई भवन तक नही है | इन घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि राजनैतिक-इच्छाशक्ति के अभाव में प्रदेश की प्रशासनिक-तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है |
श्री भनोत ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र के माध्यम से पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि तमाम संसाधनों के उपलब्ध होने के बावजूद प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा और लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग प्रदेश में सर्वाधिक घोटालों, गड़बड़ियों और अनिममिताओं का अड्डा बन चुका है | मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2020-21, 2021-22 (तीन बैच) के छात्रों की परीक्षाएं आयोजित नही की गई, जिससे नर्सिंग कॉलेज के तीन बैच के छात्र परीक्षाओं का इंतज़ार कर रहे है | परीक्षाएं आयोजित न होने के कारण छात्रों को द्वितीय वर्ष की छात्रवृत्ति भी नही मिल रही है | छात्रों से फीस लेने के चक्कर में महाविद्यालय द्वारा छात्रों को बिना परीक्षा अगले सेमेस्टर में प्रमोट किया जा रहा है | महोदय, एक तरफ प्रदेश सरकार जनता को स्वर्णिम मध्यप्रदेश का सपना दिखा रही है और दूसरी तरफ शासन की लापरवाही के कारण नर्सिंग के छात्रों को कॉलेजो द्वारा बिना परीक्षा दिए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की पढ़ाई कराई जा रही है |
श्री भनोत ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की निष्पक्षता और समयावधि में पूरी हों, इस हेतु उनके हस्तक्षेप की गुजारिश की है, साथ ही जांच में पाये दोषी राजनेताओं, अधिकारियों और कॉलेजो पर सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में फिर किसी छात्र के साथ ऐसा अन्याय और दमन ना हों |



