समस्त विष्व को युगऋषि के अजष्य अनुदान

जबलपुर दर्पण। हमारा देष हमेषा से ही जगत गुरू रहा है, क्योंकि यहॉं पर हमेषा ही गुरू को भगवान तुल्य माना गया है। भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेष के समान ही इन्हें भी तीनों गुणों से रहित माना गया है। गुरू में ही वह षक्ति होती है जो पत्थर को भी पारस बना देता है। अपने षिष्यों को भौतिक, आघ्यात्मिक एवं वैज्ञानिक हर प्रकार का ज्ञान ही प्राप्त नहीं कराता है। अपूर्व उसकी रक्षा तीनों लोक एवं ब्रह्मा लोक तक करता है। ऐसे ही एक अवतारी सत्ता ने इस धरा पर लोगों के कष्ट हरने, उनके जीवन में ज्ञान का दीपक जलाने एवं कुरुतियों-अंधविष्वासों तथा अत्याचारों से व्यक्ति को मुक्ति दिलाने हेतु उत्तर प्रदेष जिला आगरा की आवलखेड़ा जनपद के जमींदार परिवार में पंडित श्रीराम षर्मा जी के रुप में जन्म लिया। आगे चलकर वे बडे़ ही तपस्वी हुये एवं आखिल विष्व गायत्री परिवार की स्थापना कर वे इसके संस्थापक कहलाये ।
युगऋषि वेदमूर्ति पंडित श्रीराम षर्मा आचार्य जी ही विष्व के एक मात्र ऐसे संत, ऋषि, लेखक, आध्यात्मिक गुरू हुये हैं, जिन्होंने युग को बदलने की बात कही, जिनकी एक-एक बात आज साकार होती जा रही है। युग परिवर्तन को मूतरूप प्रदान करने हेतु आपके द्वारा 24 हजार से अधिक गायत्री षक्तिपीठों, प्रज्ञापीठ, गायत्री चेतना केन्द्र, गायत्री परिवार का मुख्यालय षांतिकंुज हरिद्वार, आपकी तपस्थली गायत्री तपोभूमि मथुरा, ब्रह्मवर्चस षोध संस्थान, जन्म भूमि आवलखेड़ा, देव संस्कृति विष्वविघालय, अखण्ड ज्योति संस्थान एवं युगनिर्माण योजना पत्रिका की प्रेस का निर्माण कराया जहॉं पर समाज के प्रत्येक नागरिकों/महिलाओं/बच्चों के सषक्त निर्माण हेतु भिन्न प्रकार के प्रषिक्षण निःषुल्क चलाये जाते हैं। नित्य गायत्री यज्ञ, 16 संस्कार एवं दहेज विहीन विवाह के अलावा स्कूल चलाये जा रहे हैं ।
आचार्य श्री के द्वारा चारों वेद, उपनिषदांे का हिन्दी में अनुवाद किया। रामायण, गीता 18 पुराण, 108 बाडंमय साहित्य, गायत्री महाविज्ञान के साथ 3200 पुस्तकों का लेखन किया गया जो कि समस्त विष्व का मार्ग-दर्षन विज्ञान एव आध्यात्मवाद से कर रही हैं । आपके पिछले तीन जन्म इस प्रकार से थें प्रथम समर्थगुरु श्रीरामदास जी जोकि षिवाजी के गुरु थे,श्रीरामकृष्ण परमहंस जी जोकि विवेकानंद जी के गुरु थे एवं कबीरदास के रुप मे हुए।
आचार्य जी अपने गुरू हिमालयवासी श्रीसर्वश्रवारानंद जी के द्वारा बसंत पंचमी को दिये हुये दिषा-निर्देषों पर चलते हुये 24 वर्षों तक छाछ एवं एक रोटी खाकर गायत्री मंत्र के चौबीस-चौबीस महापुष्चरण संपन्न किये। प्रत्येक जाति वर्ग के घरों में जाकर आपके द्वारा कथा एवं यज्ञ स्वयं के संपन्न कराकर गायत्री मंत्र को श्राप मुक्त कर घर-घर में पहुॅंचायंे। देष को आजाद कराने हेतु आप महात्मा गॉंधी, श्री रफी अहमद किदवई, श्री मदनमोहन मालवीय, श्री जवाहर लाल नेहरु जी की माताजी श्रीमती स्वरुपारानी नेहरु के साथ अनेकों बार जेल गये। अॅंग्रेजों से लड़ते हुये झंडे को मुॅंह में तब तक दबाये रहे जब तक की बेहोष नहीं हो गये। आचार्य जी को भारत सरकार द्वारा श्रीमत्त की उपाधी प्रदान की गई तथा आपके नाम पर एक डाक टिकिट भी जारी किया। पंजाब सरकार ने आचार्य जी को लाईट ऑफ इंडिया की उपाधि प्रदान की गई।
राष्ट्र के नवनिर्माण हेतु 1938 से आज तक अखंड ज्योति एवं युग निर्माण पत्रिका का सफल सम्पादन बिना किसी विज्ञापन के आज भी किया जा रहा है। दोनों पत्रिकायें करोड़ों व्यक्तियों का मार्ग-दर्षन देष-विदेष की प्रमुख भाषाओं में कर रही हैं। आज 110 से अधिक देषों में 20 करोड़ से अधिक गायत्री साधक है जो कि आचार्य श्री को अपना गुरू मानते हैं। देष-विदेष 108 अष्वमेध यज्ञ का सफल संचालन आपकी आध्यात्म्कि षक्ति के द्वारा ही सम्भव हो जिसके द्वारा करोड़ांे व्यक्तियों को षाकाहारी बनाकर लाखों पषु-पक्षियों की रक्षा की गई। करोड़ांे व्यक्तियों को नषे के मुक्त कराकर उनके जीवन को खुषहाल ही नहीं किया अपूर्व सफल दाम्त्य जीवन की ओर अग्रसर किया गया हरित क्रांति के तहत् गायत्री परिवार के करोड़ों पोधों का रोपन भी आपकी ही षिक्षा का फल है। इक्कीसवीं सदी नारी का उद्धोष करने वाले विष्व के पहले ऋषि हुए जिन्होंने महिलाओं के द्वारा बडे़-बडे़ गायत्री महायज्ञ ही सम्पन नहीं कराये बल्कि उन प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ाने हेतु प्रषिक्षित भी किया। आचार्य श्री के बारे में लिखना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा होगा। गुरू पूणिमा के पावन पर्व पर करोड़ों गायत्री साधक द्वारा आपको श्रद्वा सुमन अर्पित कर रहे हैं।



