जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

ममतामयी माँ को मिला उपहार

जबलपुर दर्पण। चार साल हो गए मेरी शादी को । सोचते सोचते शिवानी धम्म से सोफे पर बैठ गई। अनमने मन से अभी अभी पति को टिफिन तैयार करके दिया था। दिन रात एक ही चिंता खाए जा रही थी कि मैं मां कब बनूंगी। मन में स्मृतियों के बादल छाने लगे। वह अपने माता पिता के साथ रुड़की में रहती थी। अक्सर किसी विवाह अथवा किसी के जन्मदिन के फंक्शन पर जब माता पिता के साथ वहां जाती थी तो उसकी दृष्टि उन जोड़ों पर रहती थी जिनके पास नन्हे-मुन्ने बालक होते थे। उसे बच्चे बहुत प्यारे लगते थे ‌। उसका केवल एक ही सपना था की शादी के शीघ्र बाद मैं भी मां बनूं। तभी डोर बैल बजी। उसकी तंद्रा भंग हुई। कामवाली बाई थी। कामवाली बाई काम करके चली गई। उसका मन नाश्ता करने को नहीं हो रहा था। अपनी स्मृति में खोई जाकर पलंग पर जाकर लेट गई। एकदिन उसकी शादी तय हो गई।मुजफ्फरनगर यूपी दिनेश बलयान के साथ। बारात आई। उसके मन में लड्डू फूट रहे थे कि शीघ्र ही उसके पास भी एक नन्हा मुन्ना होगा। दिनेश शिवानी को लेकर जबलपुर आ गया जहां वह नौकरी करता था। धीरे-धीरे समय गुजरने लगा एक साल हो गया दो साल हो गये तीन साल हो गये और चार साल भी हो गये। बेटे की आस में उदास रहने लगी। इसी बीच उसके पति के सहकर्मियों की पत्नियों हेतल नीतू‌ रुबी सुरभि सभी मां बन बन चुकी थी। न जाने भगवान उसके प्रति क्यों नहीं दयालु हो रहा था। पति-पत्नी दोनों में भी किसी प्रकार की कमी न थी। निराश हताश शिवानी मंदिरों के चक्कर लगाने लगी। पूजा में भी कोई कमी न छोड़ी। ऐसा लगता था जैसे भगवान उसके धैर्य की परीक्षा ले रहे हों। बत्ती चली गई थी। पंखा बंद होने से शिवानी की तंद्रा भंग हुई। अलसाई शिवानी उठी जैसे तैसे दो रोटी खा कर फिर लेट गई। शाम को उसके पति दिनेश ने आकर उसे उठाया। शिवानी की दिनचर्या अब लगभग यही हो चुकी थी। लगभग दो महीने और बीत गए। अचानक एक दिन शिवानी को उल्टी हुई। पहले तो समझी कि शायद फूड प्वाइजनिंग है। फिर अचानक ध्यान आया कि उल्टी होने से गर्भ के चांसेस होते हैं। दिनेश के ऑफिस आने के पूर्व ही शिवानी डॉक्टर के पास चैकअप कराने हेतु जाने के लिए तैयार होकर बैठ गई। जैसे ही दिनेश आया उसके साथ डॉक्टर के पास चल दी। डाक्टर ने शुभ समाचार सुनाया।
अब तो जैसे दुनिया जहान का खजाना मिल गया हो शिवानी का। हर्ष के अतिरेक से रोने लगी। खुशी को रोक नहीं पा रही थी । उसका सपने जो पूरा होने जा रहा था। घर आते ही उसने अपने माता-पिता को अपने ससुराल में सब को बता दिया‌। मुरझाई शिवानी खिल गई। नौ महीने तक शिवानी आनंद के सागर में डूबती इतराती रही। फिर एक दिन उसका सपना साकार हो उठा। बेटा‌ हुआ‌। आज शिवानी का बेटा लगभग चार-पांच साल का हो गया है। अपनी ममता के सागर में अपनी बेटे दिव्यांश को पूरा डुबोकर रखा है। गलियों में दौड़ता तो उसके पीछे दौड़ती है। शिवानी को यह तक होश नहीं रहता कि सामने कौन आ रहा है उसको नमन करना है कि नहीं। केवल बेटे में खोई रहती है। उसका प्यार उसका संसार केवल उसका बेटा ही है बस। ममतामयी शिवानी का सुखद, सलोना परिवार यही तो है भगवान का सच्चा उपहार।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88