सैकड़ों वरिष्ठ प्रधानाध्यापक हुए उच्च पदों में प्रभार लेने से वंचित

जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शिक्षा विभाग में लम्बे समय से आस लगाए बैठे वरिष्ठ प्रधानाध्यापक जो कि विगत 15 से 20 वर्षों से कभी उच्च श्रेणी शिक्षक से पदोन्नत हुए आज आस लगाए बैठे थे कि शासन उन्हें उनका प्रशासनिक अनुभव,वरिष्ठता एवं योग्यतानुसार उचित न्याय करेगा, किन्तु नीति विशेषज्ञों ने ना जाने क्या सोचकर उन्हें इनसे कनिष्ठ उच्च श्रेणी शिक्षकों को प्रमोट /उच्च प्रभार देकर लेक्चरर पद पर उच्च पदों पर पदाकंन सूचियां निकालना शुरू कर दी है जबकि वरिष्ठ प्रधानाध्यापकों की नियुक्तियां 1987,88,99 और पहले से हैँ । कुछ तो सेवानिवृत्त ही होंने वाले हैं।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार समस्त जिलों से जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा पृथक से प्रधानाध्यापकों की वरिष्ठता सूची लोक शिक्षण संचालानालय,भोपाल को पूर्व में भेज दीं गई थी किन्तु जो (एल.डी. टी.)सहायक शिक्षक वर्ष 2012 या 2015 तक प्रमोट हुए, वैसे उच्च श्रेणी शिक्षकों को वे अब लेक्चरर पद पर उच्च प्रभार पदों पर पदाकंन सूचियां में शामिल कर लिये गये ,किन्तु ऐसे अनेक वरिष्ठ प्रधानाध्यापकों का नाम किसी भी प्रमोशन, उच्च पदों पर प्रभार वाली सूचियों में शामिल नहीं है, जबकि लगभग सभी प्रधानाध्यापक एम् ए,,डबल एम् ए, एवं व्यवसायिक योग्यताएं योग्यता एवं प्रशासनिक अनुभव रखते हैँ,ध्यान देने योग्य बात है,कि प्रधानाध्यापकों को पूर्व से राजपत्रित अधिकारी सूची में शामिल कर रखा गया है एवं पूर्व में इन्हें विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के पदों पर पदोन्नत किया जाता था एवं उच्च श्रेणी शिक्षकों एवं लेक्चररों कों 40/60 % प्रतिशत से प्राचार्य पदों पर प्रमोशन दिया जाता था,किन्तु वर्तमान समय में नीति विशेषज्ञ समिति द्वारा इन लोकसेवको के साथ नाइंसाफी कर इन्हें कहीं का भी नहीं छोड़ा, जबकि वर्तमान में इनकी सेवाएं लगभग 30 से 35 की हों चुकी है। ऐसे प्रदेश में लगभग पांच हजार प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं जिन्हें शासन -प्रशासन को अनेक पत्राचार, विज्ञप्ति,ज्ञापन आदि देने के बावजूद इन्हें उचित न्याय नहीं मिल पा रहा है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर,भास्कर गुप्ता,ऋषि पाठक, दुर्गेश खातरकर,विश्वनाथ सिंह, आकाश भील, जी आर झारिया, सतीश खरे,धर्मेंद्र परिहार, नितिन तिवारी,आसाराम झारिया, समर सिंह, महेश मेहरा, देवेंद्र राजपूत, भोजराज विश्वकर्मा, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, चंद्रभान साहू, सुरेंद्र परसते,अंजनी उपाध्याय,आदेश विश्वकर्मा, अजब सिंह सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, लोचन सिंह, देव सिंह भवेदी, मनोज कोल, पवन सोयाम, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, सुधीर गौर, विष्णु झारिया, विशाल सिंह, कमलेश दुबे, संदीप परिहार,राकेश मून,अजय श्रीपाल, मदन पांन्द्रो, राशिद अली, मोदित रजक,कल्पना ठाकुर, पुष्पा रघुवंशी, रेनू बुनकर, चंदा सोनी, प्रेमवती सोयाम, योगिता नंदेश्वर, जागृति मालवीय, पूर्णिमा बेन, क्षिप्रा सिंह, अम्बिका हँतिमारे,ब्रजवती आर्मो, भागीरथी परसते,माया सोयाम, सिया पटेल, शबनम खान, शायदा खान इत्यादि ने शासन- प्रशासन से मांग की है, कि वरिष्ठ प्रधानाध्यापकों की वरिष्ठता ,योग्यता, प्रशासनिक अनुभव कों संज्ञान में रखते हुए अतिशीघ्र उचित न्याय कर उन्हें उच्च पदों पर प्रभार वाली सूचियों में शामिल करें ताकि भविष्य में इन्हें अपने साथ हों रहे अन्याय हेतु न्यायालय की शरण में ना जाना पड़े।



