जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

भौतिकवाद के कारण आज विश्व के सामने जल की समस्या :डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा

जबलपुर दर्पण। विश्व में भारत ही वह देश है जिसने विश्व के कल्याण की बात की है। हमने जल को भगवान के रूप में माना है। लेकिन भौतिकवाद के कारण आज विश्व के सामने जल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उक्त विचार सोशल साईंस एण्ड मैनेजमेंट वेलफेयर एसोसिएशन, रेडियंट कॉलेज एवं युवा आर्थिक परिषद के द्वारा जल का संग्रहण, संरक्षण, प्रबंधन एवं पर्यावरण विकास विषय पर ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में युवा आर्थिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा ने व्यक्त करते हुए कहा की जल ही जीवन का आधार है। यह 2001 में 1,816 घन मीटर से घटकर 2011 में 1,545 घन मीटर हो गया। हमारे देश में पानी की उपलब्धता पहले से ही प्रति व्यक्ति परिभाषित उपलब्धता और कम होकर 2025 तक व्यक्ति 1,340 घन मीटर और 2050 तक 1,140 घन मीटर हो जाने का अनुमान है। भारत की जनसंख्या दुनिया की आबादी का 16 प्रतिशत है, लेकिन यहां जल संसाधन दुनिया के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत ही है। भारत में वर्षा से उपलब्ध वार्षिक जल लगभग 4,000 घन कि.मी. है। भारत में वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत संसाधन है जबकि यहां मानव आबादी विश्व की 16 प्रतिशत और पशुधन 15 प्रतिषत है। भारत में 35 करोड़ एवं दुनिया में 220 करोड़ लोगों के सामने पेयजल की संकट आज है। 2040 तक हर चार में से एक बच्चे को जल संकट का सामना करना पडे़गा। युनिस्कों के अनुसार 2030 तक 70 करोड़ लोगों के सामने जल के कारण विस्थापन का खतरा है। संगोष्ठी में फैरिल इरहाम मुजाकी-इंडोनेशिया, डॉ. कुबेर सिंह गुरूपंच-छत्तीसगढ़ आदि ने भी अपना विषय रखा। संगोष्ठी का संचालन डॉ. प्रवीण कुमार झा-संयोजक एवं ब्रजेश उइके के द्वारा किया गया। संगोष्ठी में 94 प्रतिभागियों ने भाग लिया एवं शोधपत्रों का वाचन भी किया गया। संगोष्ठी में बेस्ट पेपर प्रजेंटेशन का आवार्ड भी दिया गया। संगोष्ठी में आये शोध पत्रों का प्रकाशन अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल में किया जायेगा।

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