टीचरों के अभाव में प्राथमिक शालाएं हो रही प्रभावित

जबलपुर। मध्य प्रदेष जागरूक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के जिलाध्यक्ष रॉबर्ट मार्टिन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि शासकीय प्राथमिक शालाएं षिक्षकों के अभाव में जूझ रही हैं क्योंकि प्रायमरी शाला में सिर्फ दो षिक्षक दिये जाते हैं अगर तीसरा षिक्षक चाहिए हो तो शाला में दर्ज संख्या 60 छात्रों के ऊपर होनी चाहिए। याने 30 छात्रों के ऊपर 1 षिक्षक दिया जाता है। जबकि तीसरी कक्षा से पांचवी कक्षा के 4 विषय होते हैं हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, पर्यावरण एवं इसके साथ दक्षता की तीन पुस्तक हिन्दी, अंग्रेजी, गणित एवं इसके साथ एफ.एल.एन के भी तीन विषय का कार्य करना होता है।
कुल मिलाकर 4$3$3 बराबर 10 याने तीसरी कक्षा में 10 विषय, चौथी कक्षा में 10 विषय एवं पांचवी कक्षा में भी 10 विषय कराने होते हैं यानि 10 गुणा 3 बराबर 30 विषय। पहली और दूसरी कक्षा में 3$1: 4 और 4 $ 4: 8 विषय इन्हे जोड़े तो 30$8 बराबर 38 विषय होते हैं जो कि 2 षिक्षक के लिए असंभव कार्य सिद्ध हो रहा है। वर्तमान में पहली से पांचवी के लिए कक्षावार षिक्षक होना चाहिए यानि हर कक्षा के लिए एक शिक्षक होने चाहिए। संघ के जिलाध्यक्ष रॉबर्ट मार्टिन, जियाउर्रहीम, गुडविन चार्ल्स, राकेस श्रीवास, हेमन्त ठाकरे, स्टेनली नॉबर्ट, दिनेष गौंड़, रॉबर्ट प्रांसिस, राजकुमार यादव, प्रदीप पटेल, एनोस विक्टर, सुनील झारिया, उमेश ठाकुर, आषाराम झारिया आदि ने मुख्य मंत्री महोद्य एवं शिक्षा मंत्री महोद्य से मांग की है कि शासकीय प्राथमिक शालाओं में हर कक्षा में एक शिक्षक की अनिवार्यता सुनिष्चित की जाए।



