उर्दू भाषा में होगी संगोष्ठी एवं पुस्तकों का होगा विमोचन

जबलपुर दर्पण । उर्दू भाषा के 8 रचनाकारों की पुस्तकों एवं मुम्बई से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका का “जबलपुर असरी अदब विशेषांक” “उर्दू आंगन” का लोकार्पण 27 मई शाम 4 बजे अंजुमन इस्लामिया गर्ल्स कॉलेज गोहलपुर में आयोजित है । इस अवसर पर भाषाविदों द्वारा उर्दू भाषा के पतन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा । यह सच है कि जो भाषा रोजगार मूलक नहीं होती उस का और उसकी लिपि का पतन रफ़्ता रफ्ता शुरू हो जाता है, इन्हीं परिस्थिति से यह जवान भी गुजर रही है। उर्दू हिन्दुस्तानी तहजीब की मिली जुली विरासत अपने दामन में समेटे हुए हैं। इस की मिठास और सुरीलेपन में गंगा जमुनी संस्कृति की खुशबू शामिल है, उर्दू जबान को परवान चढ़ाने में नगर के सभी धर्मालवियों साहित्यकारों ने एक साथ अपनी वर्षों पुरानी तहज़ीब व तमदुन को संजोए रखा है। भाषा का कोई धर्म नहीं होता, उर्दू जबान को अरबी और फारसी से दीनी तालीमात और रिवायतें विरसात में मिलीं। कौम का पूरा दीनी साहित्य इसी भाषा में संरक्षित है। अगली पीढ़ी के लिए इसे बचाया जाना लाज़मी है । उर्दू सेवकों में मुसलमानों के साथ-साथ नगर के गैर मुस्लिम रचनाकर भी शामिल हैं जैसे श्री पन्ना लाल श्रीवास्तव नूर, डॉ. प्रेमचंद्र मजहर, प्रोफेसर श्री महादेव प्रसाद सामी, श्री चौधरी जय किशन हबीब, श्री प्रेम कृष्ण सहगल, श्री कामता प्रसाद गुरू, श्री रामेश्वर प्रसाद गुरू, श्री नत्थूलाल जी सराफ, एडवोकेट लल्लू भार्गव, श्री दामोदर प्रसाद चक्रवर्ती प्रकाश, श्री बल्देव कृष्ण सहगल असर, श्री चौधरी शिव नाथ आलम, श्री हीरा लाल अमन, श्री रघुवीर अम्बर, श्री एम. एल. बहोरिया अनीस, श्री तिलक राज पारस, डॉ.बी.सच्चिदानंद अख्तर, श्री जमना प्रसाद झारिया संगम, श्रीमति छाया नरगिस, श्रीमति अनिता श्रीवास्तव तमन्ना, श्री संजय सेठ रहबर, श्री रघुनंदन शर्मा दानिश, श्री जे.एन. श्रीवास्तव, और पूर्वजों में मुंशी श्री अम्बा प्रसाद हमदम, मुंशी पं. रामनाथ साबिर, मुंशी श्री खिलावन लाल बेदम, मुंशी श्री लक्ष्मण प्रसाद शाद, बाबू सतेन्द्रनाथ मुख उपाध्याय, पं. विशाल चरण कीर्ति, दयाल चंद श्रीवास्तव, सरदार ज्योति सिंह रागी, पं. रामगोहार, मुंशी सिकन्दर नारायण ज्योतिष, पं. बिरजु प्रसाद चौपड़, मुंशी कोल प्रसाद, सरदार महेन्द्र सिंह नादिम और इसी तरह के सैकड़ों सम्मानीय नाम शामिल हैं इन हस्तियों के बगैर इस शहर की तारीख-ए-उर्दू मुकम्मल नहीं कही जा सकती, संगोष्ठी में उर्दू भाषा की समस्याओं पर देश के विभिन्न अंचलों से पधारे हुए भाषाविद आलेख प्रस्तुत करेंगे । डॉ. शर्फुद्दीन साहिल नागपुर, डॉ. वाहिद नज़ीर जामिया मिलिया नई दिल्ली, डॉ. मन्सूर फ़रीदी गया- बिहार, मसरूर शाहजहाँपुरी, श्री मुशीर अंसारी मुम्बई, अशफाक उमर मालेगाँव, इम्तियाज गोरखपुरी, जावेद राना, ताहिर नक्काश, लतीफ़ शाहिद बुरहानपुर, जबलपुर का प्रतिनिधित्व करेंगे, डॉ. महमूद शेख, इंजि.सलीम अंसारी, सैयद अमजद रब्बानी, प्रोफेसर अशफाक आरिफ इत्यादि के व्याख्यान होगा । उर्दू एकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी को कमाल पब्लिकेशन जबलपुर एवं उर्दू गंगन संस्था मुम्बई द्वारा सम्मानित किया जाएगा । डॉ. नुसरत मेहदी को यह सम्मान, देश के विभिन्न प्रान्तों की उर्दू एकादमियों के तुलना में उर्दू एकादमी द्वारा बेहतर और सराहनीय कार्यकरदिगी के लिए दिया जाएगा जिन विषयों पर विद्वानों द्वारा आलेख प्रस्तुत किए जाएंगे, संक्षिप्त में वो यह हैं 1.आधुनिक युग में शिक्षा के बुनियादी ढांचों में वक्त की जरूरत के अनुसार बदलाव नई शिक्षा प्रणाली पाठ्यक्रम में शामिल किया जा चुका है। उर्दू प्रभावित आबादी ने इसी अनुरूप अपने आप को अपडेट कर लिया है ? मातृभाषा को अतिरिक्त समय में कैसे पढ़ें इस पर विचार विमर्श 2. दीगर अन्य भाषाओं और अन्य आधुनिक विषयों के साथ साथ जहाँ उर्दू शिक्षा का प्रबंध नहीं है वहाँ रेगुलर शैक्षणिक पाठयक्रम को डिस्टर्ब किये बगैर हम उर्दू भाषी छात्रों के लिये उर्दू शिक्षा का प्रबन्ध कैसे कर सकते हैं इस का रोड मैप होना चाहिए । 3. क्या मात्र शेर-शायरी में उर्दू भाषा का भविष्य निहित है ? या शायरों को शायरी के साथ ज़बान की तरक्क़ी पर भी ध्यान देना चाहिए । 4. हमारी शिक्षण संस्थाओं, साहित्यिक संगठनों को भाषाई प्रोउन्नित के लिए केवल सरकार पर निर्भर रहना चाहिए समस्याओं को समाज सेवियों के माध्यम से निराकृत करना चाहिए । उर्दू रस्मुल खत (लिपि) का पतन रोका जा सकता है रोजगार मूलक शिक्षा के साथ तहजीबी और अदबी जबान उर्दू और उस में मौजूद दीनी सहित्यिक धरोहर को कैसे संरक्षित और सुरक्षित रखा जाएगा । जिन पुस्तकों का विमोचन होगा 1.यादों की जज़ीरे रोशन हैं डॉ. अफसर खान 2. जबलपुर स्कूल ऑफ थॉट 3. जबलपुर में उर्दू 1956 के बाद 4. रेत की तहरीर जावेद राना 5. रूबाब-ए-फिक्र जमील अहमद 6. तजल्लियाते बज़्मे सना रियाज़ आलम 7. मिज़ाह बख़ैर शहनाज़ बेगम फीरोज़ कमाल मसरूर शाहजहाँपुरी इन पुस्तकों के अलावा मुम्बई से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक मैगजीन उर्दू आँगन के जबलपुर साहित्यिक विशेषांक का लोकार्पण भी होगा । यहाँ यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इन समस्त कृतियों का प्रकाशन कमाल पब्लिकेशन जबलपुर के व्यक्तिगत फण्ड से किया है । कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.शर्फुद्दीन साहिल, मुख्य अतिथि डॉ. वाहिद नज़ीर एवं डॉ. नुसरत मेहदी निदेशक म.प्र. उर्दू एकेडमी होंगी। प्रोफेसर डॉ.मंसूर फरीदी गया बिहार वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। उर्दू आंगन के सम्पादक मुशीर अंसारी एवं इम्तियाज गोरखपुरी विशेष रूप से इस संगोष्ठी में शिरकत के लिये जबलपुर पधार चुके हैं । पत्रकार वार्ता में डॉ. असफर खान अलमशरकी, यूनुस अदीब, गुलाम गौस, आतिफ रशीद कमाल, भी उपस्थित रहे । दूसरे दिन दिनांक 28 मई 2023 को अंसार भवन गोहलपुर में अदबी ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन रात्रि 9 बजे से किया गया है। इसमें स्थानीय और भारत के कई नगरों से आये हुए मेहमान शायर अपना कलाम प्रस्तुत करेंगे ।जबलपुर दर्पण ।



