जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

भाषा और सवाल पूछना पत्रकारिता की सबसे बड़ी ‘चुनौती

जबलपुर दर्पण। चुनौतियाँ और समाधान विषय पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार व संपादक डॉ. विनोद पुरोहित ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में दो तरह की चुनौतियां हैं-भाषा और सवाल पूछने की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता आज उद्योग के रूप में परिवर्तित हो गया है। उद्योग की अपनी मजबूरी है इसलिए पत्रकारिता भी इससे प्रभावित हो रही है। यह कड़वी बात लेकिन इसे सभी को स्वीकारना होगा। इस अवसर पर नगर के साहित्य, कला, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, पत्रकारिता क्षेत्र की प्रमुख विभूतियां व मीडिया विद्यार्थी उपस्थि‍त थे।

डॉ. विनोद पुरोहित ने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म सवाल पूछना है। आज अखबारों में सवाल पूछने बंद हो गए हैं। व्यावसायिकता करार का आधार बन गई। आम पाठक इन चुनौतियों से अनजान हैं। पाठक को चयन कर उत्कृष्टता पत्रकारिता का समर्थन करना होगा।डॉ. विनोद पुरोहित ने डॉ. मूर्ति का स्मरण करते हुए कहा कि वे सिर्फ उनके शिक्षक नहीं थे बल्कि उनके साथ जीवन को जिया है। डॉ. पुरोहित ने कहा कि उन्होंने डॉ. मूर्ति से जीवन के मूल मंत्रों का पाठ अर्जित किया है जो आज तक बरकरार है।वरिष्ठ पत्रकार व संपादक रवीन्द्र वाजपेयी ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि पत्रकारिता में चुनौतियां हैं लेकिन इसका समाधान अभी तक नहीं निकला है। सबसे बड़ी समस्या पाठकों ने समाचार पत्रों से सवाल पूछने बंद कर दिए हैं। पाठक अखबारों से दूर होते जा रहे हैं। पत्रकारिता में अपवाद का कोई स्वर ही नहीं होता है।विशिष्ट अतिथि अधीक्षण पुरातत्वविद् जबलपुर परिक्षेत्र डॉ. शिवाकांत बाजपेई ने कहा कि पत्रकारों व पत्रकारिता को चुनौती स्वयं या अपने भीतर से है। उन्होंने कहा कि इतिहास, संस्कृति व भाषा को बचाना पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती है।

मीडिया स्टडी सर्किल के संयोजक लक्ष्मीकांत शर्मा ने डॉ. जे. एस. मूर्ति व्याख्यान माला के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि डा. मूर्ति जबलपुर की संस्कृति,सांस्कृतिक, साहित्यिक, कला, छायांकन व शैक्षणिक व शोध क्षेत्र में रचे बसे हुए थे। उनके दिल में जबलपुर धड़कता था। प्रत्येक वर्ष उनकी स्मृति में डॉ. मूर्ति के विद्यार्थी व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किए जाते हैं।कार्यक्रम में टीवी जर्नलिस्ट संजीव चौधरी, छायाकार बसंत मिश्रा, मुकुल यादव, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी वेदप्रकाश, लेखक पंकज स्वामी ने संक्षेप में डॉ. जे. एस. मूर्ति के व्यक्तित्व व कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. जे. एस. मूर्ति की छात्रा चित्र प्रदर्शनी संयोजित की गई। डॉ. मूर्ति पर केन्द्रि‍त एक स्मारिका का विमोचन अतिथियों ने किया।व्याख्यान माला कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत राजीव कुमार शुक्ल, राजेन्द्र चंद्रकांत राय व बसंत मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मीकांत शर्मा व संजय प्रसाद ने किया।

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