महाराजा अग्रसेन जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन

जबलपुर दर्पण। समरसता सेवा संगठन द्वारा महाराजा अग्रसेन जी की जन्मजयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन मुख्य अतिथि प्रो.कौशल दुबे, मुख्य वक्ता डॉ पवन स्थापक, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष यतीश अग्रवाल, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, सचिव उज्ज्वल पचौरी की उपस्थिति में शाही पैलेश बारातघर में किया गया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ पवन स्थापक ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा महाराजा अग्रसेन जी सूर्यवंशी राजा थे और भगवान श्रीराम के पुत्र कुश जी के वंशज थे। अग्रसेन जी वित्त नीति के कुशल प्रबंधक थे ऐसा हम सभी ने पढ़ा और सुना है और तत्कालीन समय में देश राज्य की परिस्थिति रही होगी कि लोगो को एकसूत्र में जोड़ने के लिए एक पैसा और एक ईंट देने का आह्वान किया। जिस तरह आज सामाजिक समरसता की देश और दुनिया में महती आवश्यकता है वैसे ही राजा अग्रसेन के काल मे हर वर्ग उन्नति करे सभी समृद्ध रहे इस हेतु सभी को जोड़ने के लिए उन्होंने वित्त नीति को प्रबल किया।उन्होंने कहा महाराजा अग्रसेन ने अपने काल मे निश्चित रूप से रामराज लाने का प्रयास किया और उनके शासन में सुख और समृद्धि का वातावरण था माता लक्षमी उनकी आराध्यदेवी थी और आज उनके वंशज के रूप में अग्रवाल समाज के लोगो पर माता लक्ष्मी की कृपा आज भी बरसती है।
उन्होंने कहा सामाजिक समरसता के किये स्वामी रामतीर्थ जी के विचारों को पढ़ना चाहिए उन्होंने अपने विचारों से संदेश दिया कि पूरा भारत एक है और यह सिर्फ एक देश नही बल्कि जीता जागता राष्ट्रपुरुष है और उन्होंने कहा भी है था कि यदि हमारे पैर में चोट लगेगी तो उसका असर हमारे मस्तिष्क में ही होगा उसी तरह हमारे देश का कोई भी हिस्सा यदि पिछड़ा रह गया तो उसका असर देश के हर हिस्से में होगा।उन्होंने कहा हमारा देश प्रारम्भ से ही समरसता के भाव को मानता आया है किंतु आज समाज का हर व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो गया है अपने और अपने परिवार के सुख के लिए ही वह जीने लगा पर यह हुआ क्यों और कैसे, इसके पीछे हम जाए तो देखते है भारत पर अनेको आक्रांताओं ने आक्रमण किये और लोगो को जाति वर्ग के आधार पर बाटने का काम किया गया और जहां कर्म के आधार पर वर्गीकरण हुआ करता था वह आज जाति के आधार पर हो गया।
डॉ स्थापक ने कहा जबलपुर में गठित समरसता सेवा संगठन के द्वारा किये जा रहे कार्य आज समाज की संकुचित विचारधारा को विस्तारित करते हुए एक सोच, एक समाज एक देश की भावना को लोगो जागृत करने का कार्य करेगा इसके लिए संगठन को शुभकामनाएं देता हूँ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. कौशल दुबे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा महाराज अग्रसेन जी भारत के दो वंश सूर्यवंश और चन्द्रवंश के सेतु थे उनका जन्म तो सूर्यवंश में हुआ पर उन्होंने दोनों वंश को साथ लेकर चलते हुए समरसता का परिचय उस काल मे दिया था। हमारे यहाँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चार पुरुषार्थ बताए गए है यह चारों पुरुषार्थ एक दुसरे को जोड़ने वाली कड़ियां हैं महाराज अग्रसेन ने इन पुरुषार्थ के साथ ही शासन किया और आज अग्रवाल समाज के हमारे बंधु भगिनी भी उनके बताए मार्ग पर चल रहे है।
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा संस्कारधानी के युवकों द्वारा गठित ऐसा संगठन है जो समरस भारत और समर्थ भारत बनाने के लिए सब सबको जाने सब सबको माने के उद्देश्य से समाजसेवा का कार्य कर रहा है और हम अपने उद्देश्य को लेकर विभिन्न समाज जाति के ऐसे आराध्य की जन्मजयंती मनाते जिन्होंने अपना सर्वस्व समाज को देते हुए सम्पूर्ण समाज को संदेश दिया किन्तु उन महापुरुषों, संतो, समाजसेवियों के संदेश को लोगो ने अपनी अपनी जाति समाज मे बांध दिया इसीलिए हमने तय किया कि सर्व समाज को एकत्र करते हुए हमारे आराध्य संतो, महापुरुषों की जयंती पर विचार गोष्टी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन करेंगे और प्रसन्नता है कि कार्यक्रमों में सभी समाज के लोगो की सहभागिता होती है।



