15 दिनों में दो तेंदुओं की मौत से मचा हड़कंप

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर संभागीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्रामीण मुख्यालय सिहोरा वन परिक्षेत्र के ग्राम गौरहा चिंतावर माता पहाड़ी के निकट वन परिक्षेत्र में फिर वन प्राणी तेंदुआ की मौत से क्षेत्रों में विभिन्न चर्चाए नजर आई और वन प्राणी की सुरक्षा व्यवस्था हिला हवाली जैसी देखने को मिली। विगत दिवस घुघरा मेसर्स निसर्ग इस्पात परिसर में करेंट की मौत से वन प्राणी तेंदुआ की मौत के आरोपी का अभी तक पता नहीं चल पाया हैं और जॉच पड़ताल जारी हैं। वहीं 11 नवम्बर 2025 दिन मंगलवार को फिर इसी प्रकार से तेंदुआ का मामला सुबह सुबह वन परिक्षेत्र अधिकारी तक जा पहुंचा।
अब सवाल उठता है लगातार ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ गांव में 20 दिनों से इन तेंदुआ का मूमेंट के साथ नज़र आना दिखाई दे रहा हैं। फिर भी इनकी सुरक्षा की जगह ये मृत अवस्था में पाए जा रहे हैं।
वहीं जब मंगलवार को मीडिया सुबह सुबह कबरेंज करने पहुंची तो उन्हें घटना स्थल पर जाने और मृत तेंदुआ के फोटो वीडियो बनाने से भी रोका गया हैं क्यों? इतना ही नहीं जांच पड़ताल करने पहुंचे उच्च अधिकारी भी मीडिया से दूरियां बनाते दिखाई देते रहे। दोपहर बाद जब इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और गांव के लोगों ने बताया कि दो तेंदुओं की मौत करेंट लगने से हो गई हैं।
क्या सही क्या गलत भगवान भरोसे – क्यों बढ़ रही हैं लगातार तेंदुआ की मौते वन विभाग टीम शक के घेरे में
आप सभी लगातार मीडिया की सुखियों में ग्रामीण अंचलों में तेंदुए की मूमेंट के साथ साथ उसके पद चिन्ह, तेंदुआ का नज़र आना वही एक सप्ताह के अंदर मवेशियों का शिकार करना जैसी खबरें आने के बाद भी वन विभाग के कर्मचारियों को तेंदुआ दिखाई नहीं दिया हैं। जहां गांव के लोगों में डर और भय बना हैं वहीं इन वन प्राणियों के लगातार मौतो से सुरक्षा को लेकर विभिन्न चर्चा भी बनी हुईं हैं।
क्या वास्तव में क्षेत्र में जानकारी हैं कि दो तेंदुआ की करेंट से मौत हुई है और वन विभाग मीडिया को गुमराह करते हुए नज़र आया हैं। या फिर मृतक वन प्राणी की फोटो और वीडियो को भी इसी कारण से नहीं लेने दिया गया हैं।
क्यों डॉग स्कार्ड के इंतजार में पूरा दिन बिता दिया और मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम भी वहीं घटना स्थल पर कराया गया।
क्यों कि लोगों ने गौरहा बीट वन रक्षक अरविन्द पटेल को 15 दिनों का अर्जित छुट्टी अवकाश पर भेज दिया गया। चर्चा वहीं वर्तमान जितेन्द्र सोनी बीट गार्ड एवं डिप्टी रेंजर इन्द कुमार बड़गया के द्वारा कार्यभार में घटना बढ़ रहीं हैं।
और डीएफओ एवं एस डी ओ भी इस ओर गुमराह हो रहे हैं।
देखा जाए तो बीते माह 07/10/2025 को जंगली सूअरों के शिकार की सूचना पाकर तत्कालीन कार्यवाही करने वाले डिप्टी रेंजर व वन रक्षक बीट गार्ड को मध्यप्रदेश सिविल सेवा अधिनियम नियम 1966 नियंत्रण 9(1) के प्रावधान अनुसार तत्काल प्रभाव से निलंबित आदेश जारी कर दिया गया। और करेंट से मृत हुए इन तेंदुए की मौत पर दूरियां बनाई गई।
जबकि वन प्राणी सुरक्षा अधिनियम की धारा 1972 वन्यजीवों की मौत पर, खासकर तेंदुओं जैसे हिंसक या नरभक्षी जानवरों के मामले में, मुख्य रूप से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 11 (विशेष रूप से उप-धारा /(1(1) और (1(3) और धारा 9 लागू होती है। धारा 9 शिकार पर रोक लगाती है। वहीं धारा 11 कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे नरभक्षी जानवरों के मामले में, मुख्य वन्यजीव वार्डन को उन्हें मारने की अनुमति देने का अधिकार भी देती है। मुख्य प्रासंगिक धाराएं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9: यह किसी भी जंगली जानवर का शिकार करने पर प्रतिबंध लगाती है, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों के, जैसे कि वैज्ञानिक अनुसंधान या कानूनी अनुमति के तहत।धारा 11, उप-धारा 1(1): मुख्य वन्यजीव वार्डन को, कुछ परिस्थितियों में, जैसे कि जब कोई जानवर मानव-हत्यारा बन जाता है, तो उसे मारने की अनुमति देने का अधिकार देती है। यह अनुमति लिखित आदेश के बाद ही दी जाती है।धारा 11, उप-धारा 1(3): यदि कोई जानवर हमला करता है, तो मुख्य वन्यजीव वार्डन को तत्काल कार्रवाई करने की अनुमति देती है और अधिकारी को इस तरह की आकस्मिक स्थिति में कार्रवाई के लिए संरक्षित करती है। अन्य संबंधित धाराएं धारा 53: यदि कोई अधिकारी गलत या अनावश्यक तरीके से काम करता है, तो उसे छह महीने तक की कैद या पांच सौ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।धारा 26-27: अभयारण्यों के निर्माण और प्रबंधन से संबंधित हैं।धारा 12: यह धारा वैज्ञानिक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए शिकार की सीमित अनुमति देती है। संक्षेप में, एक हिंसक तेंदुए जैसे वन्यजीव की मृत्यु पर लागू होने वाले कानून की मुख्य धाराएं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 और धारा 11 हैं, जो शिकार पर प्रतिबंध लगाती हैं।
अब देखना हैं कि कहा लापरवाही नज़र आ रहीं हैं और कहा सुरक्षा बड़ा ही प्रश्न चिन्ह वाला विषय बना हुआ हैं।
फिलहाल वन मण्डल अधिकारी ऋषि मिश्रा द्वारा स्थानीय मीडिया से पूछने पर एक ही मृतक मादा तेंदुआ का जिक्र किया जिसकी उम्र दो वर्ष लगभग बताई गई।
दूसरे मृत तेंदुआ की बात गांव वालों की चर्चा में विलुप्त हो गई।


