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जिले का सबसे बड़ा कूम्ही सतधारा मेला पर रोक लगने से क्षेत्रीय लोगों में मायूसी

कूम्भी रियासत शासनकाल से हो रहा मेला का आयोजन

रमेश बर्मन सिहोरा/कुम्ही सतधारा। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस वर्ष हजारों वर्ष पूर्व से मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी से भरने वाला कूम्ही सतधारा के जिले का सबसे बड़ा धार्मिक मेला मै इस वर्ष जनवरी 2021 के आयोजन मै प्रशासन के द्वारा रोक लगा दी गई है । लोगों का कहना है,  जबकी राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, कार्यक्रम विस्तार रूप आयोजित किए जा रहे है ।
बहती है दूध की धारा-मान्यता है कि सप्तऋषियों की तपो भूमि सतधारा घाट में मकर संक्रांति के दिन बहती हिरन नदी पर दूध की साथ धाराएं बहा करती थी । जिसमें सप्तऋषियों ने सदियों पूर्व स्नान किया था । उस समय से अब तक धार्मिक मेला सतधारा का आयोजन चलता आ रहा है । कूम्भी रियासत शासनकाल के कलचुरी राजाओं ने इस धार्मिक मेला को बड़े रूप में विस्तार किया। पुनः मुगल राजाओं और अंग्रेजों ने व्यवसायिक रूप देकर क्षेत्रीय लोगों को प्रोत्साहित किया ।
वर्तमान में सतधारा धार्मिक मेला को जबलपुर कलेक्टर के अधीनस्थ जनपद पंचायत सिहोरा के द्वारा आयोजित किया जा रहा था । आयोजित धार्मिक मेला में देश के कई राज्यों और जिलों के लोग हिरन नदी के किनारे कुंभईश्वर महादेव के दर्शन करने, मेला देखने, और तरह तरह मनोरंजन का आनंद मेला परिसर मै  उठाते थे । सतधारा धार्मिक मेले में हजारों व्यापारी अपनी दुकान का सामान बेचकर 10 हजार  से ₹50 हजार रुपये तक की कमाई कर अपने घर को वापस लौट जाते थे।
परंतु पुरातन धार्मिक मेला पर रोक लग जाने से व्यापारी अपने आप को बेरोजगार महसूस कर रहे हैं।  कुछ व्यापारियों ने शासन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कोरोना वायरस संक्रमण की आड़ में व्यापारियों को बेरोजगार किए जाने की बात कह रहे हैं । हालांकि सिहोरा जनपद पंचायत प्रशासन ने  पुरातन धार्मिक मेला नहीं भरने का पिछले दो  सप्ताह पूर्व अपना फरमान जारी कर दिया है। धार्मिक मेला समाज के लिए मिलन समारोह माना जाता था । धार्मिक मेला में अनेक जगह के लोग मिलकर विवाहित  वर-वधु की विवाह योजना बनाई जाती है। इस तरह सप्त ऋषियों की तपो भूमि पर ऐसे कई राजनीतिक, सामाजिक, व्यापारिक, योजना बनाई जाने पर शुभ माना जाता था।
धार्मिक मेला आयोजन नहीं होने से  लोगों मानसिक, आर्थिक , व्यवसाय  ,सामाजिक, रूप से प्रभावित हो रहे है । क्षेत्रीय वर्ग के लिए लोहा, लकड़ी, फर्नीचर, प्लास्टिक, कपड़ा, वैवाहिक सामग्री, और गृहस्ती की जरूरतमंद सामग्री पूरे एक  वर्ष के उपयोग के लिए खरीद लिया जाता था। सैकड़ों गांव के बच्चे, पुरुष, महिला, वृद्ध, एक माह पहले से धार्मिक मेला के प्रति उत्साहित देखे जाते थे ।  परंतु धार्मिक मेला प्रशासन के द्वारा रोक लगाने से क्षत्रीय लोगों में उदासीनता देखने मिल रही है

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