जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

मोहिनी एकादशी में शांतम प्रज्ञा आश्रम में हुआ भजन-कीर्तन

जबलपुर दर्पण। मोहिनी एकादशी के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनोआरोग्य, दिव्यांग पुर्नवास केंद्र में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया. इस अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों ने प्रभु श्री हरि जगत के पालनहार भगवान विष्णु से प्रार्थना कर सभी के स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि, शक्ति के लिए कामना की, इस अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम के संचालक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री ने आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों को भगवान विष्णु के अवतार मोहिनी स्वरुप के विषय में बताया कि किस प्रकार समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को भगवान् ने देवताओं को पिलाकर अमरता का वरदान दिया और धर्म की रक्षा की और दानवों का संहार किया.
मोहिनी अवतार
मोहिनी भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री अवतार है। इसमें उन्हें ऐसे स्त्री रूप में दिखाया गया है जो सभी को मोहित कर ले। उसके मोह में वशीभूत होकर कोई भी सब भूल जाता है, इस अवतार का उल्लेख महाभारत में भी आता है।
समुद्र मंथन और मोहिनी अवतार समुद्र मंथन के समय जब देवताओं व असुरों को सागर से अमृत मिल चुका था, तब देवताओं को यह डर था कि असुर कहीं अमृत पीकर अमर न हो जायें। तब वे भगवान विष्णु के पास गये व प्रार्थना की कि ऐसा होने से रोकें। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर अमृत देवताओं को पिलाया व असुरों को मोहित कर अमर होने से रोका।समुद्र मन्थन के दौरान अंतिम रत्न अमृत कलश लेकर भगवान विष्णु धनवंतरी रूप में प्रकट हुए। असुर भगवान धन्वंतरि से अमृत कलश लेकर भाग गए तो विष्णु ने धंवतरि रूप को त्यागकर एक नारी का रूप लिया वे बहुत सुन्दर थी उस नारी का नाम मोहिनी रखा गया। मोहिनी ने असुरों से अमृत लिया और देवताओं के पास गईं। उन्होंने असुरों को अपनी ओर मोहित कर लिया और देवताओं को अमृत पिलाने लगीं। मोहिनी रूपी विष्णु की चाल स्वरभानु नाम का दानव समझ गया और वह देवता का भेस लेकर अमृत पीने चला गया। मोहिनी को जब ये बात पता चली तो उन्होंने स्वरभानु का सिर सुदर्शन चक्र से काट दिया किंतु तब तक उसके गले से अमृत की घूंट नीचे चली गई और वह अमर हो गया और राहु के नाम से उसका सिर और केतु के नाम से उसका धड़ प्रसिद्ध हुआ।

मोहिनी अवतार और भस्मासुर
भस्मासुर पौराणिक कथाओं में ऐसा दैत्य था जिसने भगवान शिव से वरदान माँगा था कि वो जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। कथा के अनुसार भस्मासुर ने इस शक्ति का गलत प्रयोग शुरू किया और स्वयं शिव जी को भस्म करने चला। शिव जी ने विष्णु जी से सहायता माँगी। विष्णु जी ने एक सुन्दर स्त्री का रूप धारण किया, भस्मासुर को आकर्षित किया और नृत्य के लिए प्रेरित किया। नृत्य करते समय भस्मासुर विष्णु जी की ही तरह नृत्य करने लगा और उचित मौका देखकर विष्णु जी ने अपने सिर पर हाथ रखा, जिसकी नकल शक्ति और काम के नशे में चूर भस्मासुर ने भी की। भस्मासुर अपने ही वरदान से भस्म हो गया। इस अवसर पर मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री, राकेश सेन,संतोष अहिरवार, चंचल गौतम, यश रंजन श्रीवास, मुकेश अहिरवार, अजय सोनी अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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