गायत्री महामंत्र के जाप से होती है तन और मन की शुद्धि

जबलपुर दर्पण। शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनो आरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में आध्यात्मिक सत्र के दौरान गायत्री माता का पूजन कर गायत्री मंत्र का जाप आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों और मानसिक रोगियों द्वारा किया जा रहा है, शांतम प्रज्ञा आश्रम संचालक मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री गायत्री महामंत्र का मानव जीवन में महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि गायत्री मंत्र को लेकर मान्यता है कि इस मंत्र का जाप, साधक की बुद्धि को सूक्ष्म और तेजस्वी बनाती है। धर्मशास्त्रों में गायत्री मंत्र की अपार महिमा एवं सिद्धि का गुणगान किया गया है। धार्मिक ग्रंथों और वेद शास्त्रों में गायत्री मंत्र को बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना गया है. गायत्री मंत्र को लेकर ऐसी मान्यता है कि अगर विधिपूर्वक इस मंत्र का जाप किया जाए, तो व्यक्ति को जीवन में सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. कहते हैं कि गायत्री मंत्र के जाप से शरीर निरोगी बनता है और व्यक्ति को शिक्षा क्षेत्र में खूब सफलता और तरक्की मिलती है. कहते हैं कि इस मंत्र का जाप करने से बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगता है. शिक्षा ही नहीं बाकि अन्य क्षेत्र में भी व्यक्ति को सफलता हासिल होती है.
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि इस मंत्र का जाप अगर पूरी निष्ठा और नियमपूर्वक किया जाए, तो व्यक्ति की सभी मनोकामना जल्द पूरी हो जाती हैं. मानसिक शांति के साथ व्यक्ति को व्यापार या निजी जीवन में खुशियां हासिल होती हैं. कहते हैं कि अगर कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप नियमित रूप से किया जाना जरूरी है.
जप हेतु इस मंत्र के आगे प्रणव ओम् लगाकर सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं। मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का जाप, साधक की बुद्धि को सूक्ष्म और तेजस्वी बनाती है। गायत्री मंत्र को महामंत्र कहा गया है, जो इसे सिद्ध करता है, उसकी हर कामना को मां गायत्री सिद्ध करती हैं। प्राचीन वैदिक काल से ही आचार्य व गुरु, गायत्री महामंत्र को अपने शिष्यों को प्रथम उपदेश के रूप में प्रदान करते थे। अनेक शिष्यों को गायत्री मंत्र, गुरू मंत्र के रूप में गुरूमुख से प्राप्त होने के कारण ही इसे गुरू मंत्र भी कहा जाने लगा।धर्मशास्त्रों में गायत्री मंत्र की अपार महिमा एवं सिद्धि का गुणगान किया गया है। मां गायत्री सच्चे मन से जप करने वाले साधक को मनोभिलाषित सिद्धियां प्रदान करती हैं, इसलिए गायत्री मंत्र हिन्दु धर्म के प्रसिद्ध, लोकप्रिय एवं सर्वसुलभ मंत्रों में से एक माना जाता है। गायत्री मंत्र में ईश्वरीय शक्ति की प्राप्ति के तीन प्रकारों का संक्षिप्त मार्ग निहित है। स्तुति, प्रार्थना और उपासना के माध्यम से ईश्वर को सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। स्तुति का अभिप्राय है, ईश्वर का गुणगान करना जिससे मानव मन में भक्ति पैदा होती है, ईश्वर के प्रति प्रीति बढ़ती है, फलस्वरूप भक्त पर परमात्मा विशेष अनुकंपा करते हैं।उपासना में भक्त ईश्वर के गुणों के जरिए अपने गुण, कर्म, स्वभाव को उसके मुताबिक बनाता है, यानी ईश्वर के गुणों को नित्य धारण करना या अपने व्यवहारिक जीवन में लाना उपासना है। विनम्र व्यवहार से अहंकार को छोड़कर सभी जीवों से प्रेम करते हुए ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वरीय सहायता मांगना, प्रार्थना है। जब मनुष्य का मन राग, द्वेष से मुक्त होकर ईश्वरीय स्तुति, प्रार्थना, उपासना करता है तो मंत्र आदि के माध्यम से उसकी मनोकामनाऐं शीघ्र पूर्ण होती हैं। सर्वाधिक प्रसिद्ध होने के कारण गायत्री मंत्र के बारे में जनश्रुति है कि इसे बिना गुरू के भी साधा जा सकता है। पूर्ण विधि-विधान के साथ मंत्र का सही जप एवं उच्चारण करने से जपकर्ता की कुंडलिनी शक्ति धीरे-धीरे जागृत हो जाती है। किसी भी मंत्र को श्रद्धापूर्वक नित्य अधिक से अधिक संख्या में जपने पर एवं ग्रहण, होली, दीपावली, पर्व आदि विशेष मुहूर्त में हवन आदि करने से मंत्र सिद्ध एवं शक्तिशाली होकर साधक की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
गायत्री मंत्र के माध्यम से मां गायत्री की सिद्धि व्यक्ति के अन्तर्मन को शुद्ध कर रोग और शोक का निवारण करती हैं। गायत्री मंत्र कुण्डलिनी के सभी चक्रों को उर्जावान एवं सक्रिय करता है। गायत्री मंत्र के प्रभाव से मन एकाग्र होने पर व्यक्ति जिस-जिस कामनाओं के लिए ध्यान करता है, वे सभी कल्याणकारी कामनाऐं एक-एक कर साधक के मानसिक पटल पर सर्वप्रथम प्रवेश करती हैं, तत्पश्चात् वह भौतिक रूप में साधक को प्राप्त होती हैं। मुक्ति एवं मोक्ष की साधना के लिए भी गायत्री मंत्र का विधान शास्त्रों में बताया गया है। नियमित रूप से सही उच्चारण के साथ किसी भी मंत्र का जाप करने से उस मंत्र की लय, सकारात्मक उर्जा उत्पन्न कर वातावरण में एक कंपन पैदा करती है। गायत्री मंत्र से उत्पन्न कम्पन उर्जा सर्वकामना सिद्ध एवं सर्वकल्याणकारी है।
इस अवसर पर आश्रम संचालक मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री, राकेश सेन, संतोष अहिरवार, चंचल गौतम, यश रंजन श्रीवास, मुकेश अहिरवार अन्य सदस्य उपस्थित रहे



