जागरूकता रैली निकालकर दिया नशा मुक्ति का संदेश

जबलपुर दर्पण। 31 मई विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति,मनोआरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र द्वारा जागरूकता रैली का आयोजन किया गया. जागरूकता रैली का प्रारम्भ शांतम प्रज्ञा आश्रम न्यू नर्मदा नगर से निकलकर मालगुजार परिसर मुख्य मार्ग होते हुए गोहलपुर चौक पहुंची और 5 किमी की दूरी तय करते हुए पुनः शांतम प्रज्ञा आश्रम पर समाप्त हुई. शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति,मनोआरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के संचालक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री ने बताया कि इस जागरूकता रैली का उद्देश्य आज 31 मई विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर नशे के प्रति मुख्य रूप से तम्बाकू, गुटखा, पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट से होने वाली बीमारियों से आमजनों विशेष कर युवाओं को जागरूक करना है.आज युवा पीढ़ी व्यसनों से बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है। उन्हें बचाने के लिए और व्यसन मुक्त करने के लिए नशे के प्रति रैली द्वारा लोगों को जागरूक करना बहुत महत्वपूर्ण साधन है। नशे के प्रति जागरूकता लाकर समाज मे नशा अथवा व्यसन को दूर किया जा सकता है, शांतम प्रज्ञा आश्रम द्वारा रैली के माध्यम से आमजनों को नशे से होनी वाली मानसिक अथवा शारीरिक बीमारियों के प्रति जागरूक किया तथा अपने उद्बोधन मे मुकेश कुमार सेन ने बताया कि नशा शराब, तम्बाकू, गांजा, ड्रग्स, नशीले इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवाइयां सभी नशा पीड़ित के स्वास्थ्य के साथ साथ उसकी पारिवारिक,आर्थिक, सामाजिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करता है, और अधिकतर हर नशे का प्रारम्भ किशोरावस्था मे तम्बाकू अथवा तम्बाकू से बनने वाले उत्पाद बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला से ही होता है. आज परिवार, विद्यालय,माता पिता शिक्षकों, शासन प्रशासन सभी को देश के कोने कोने मे फेल चुके नशे जैसे आतंकवाद को जिसे नार्को टेररिज्म कहा जाता है सभी को मिलकर लड़ना होगा और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार ने जागरूकता रैली के माध्यम से यह भी बताया कि सबसे पहले व्यक्ति किशोरावस्था मे तम्बाकू एवं बीड़ी, सिगरेट के द्वारा नशे का प्रारम्भ करता है यदि माता,पिता एवं शिक्षक को बच्चों के व्यवहार मे अचानक परिवर्तन जैसे अकेले रहना, अधिक गुस्सा, तनाव, अनिंद्रा, बाथरूम मे ज्यादा समय बिताना, अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करना, पढ़ाई लिखाई मे ध्यान ना देना, पैसों की अधिक मांग करना दिखे तो उसके व्यवहार का अध्ययन कर नशे के विषय मे उससे प्रेमपूर्वक बच्चे से बात करनी चाहिए यदि बच्चा तम्बाकू अथवा बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला का सेवन करता है तो किसी अच्छे मनोचकित्सक व मनोवैज्ञानिक से उसका उपचार कराना चाहिए अथवा यदि नशे की लत बढ़ गई है तो उसे किसी अच्छे नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र मे भर्ती कराना चाहिए जहाँ मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक की देखरेख मे उसका उपचार हो सके
शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनोआरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र नशा पीड़ितों अथवा नशे के अत्यधिक सेवन के कारण मानसिक रूप से बीमार हो चुके मरीजों के उपचार
के लिए एक ऐसी संस्था है जिसके माध्यम से व्यसनी व्यक्ति का मनोबल बढ़ा कर मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक एवं योग, व्यायाम, हवन, भक्ति आध्यात्मिक चिकित्सा के माध्यम से उसके मन और उसके तन को स्वस्थ किया जाता है.
इस अवसर पर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन मानसशास्त्री, स्पेशल एडुकेटर संतोष, यश रंजन श्रीवास, मुकेश अहिरवार और उपचार ले रहे नशा पीड़ितों का सहयोग रहा.



