ग्वारीघाट स्थित कुंभ मेला मैदान में श्रीराम कथा का नवम दिवस

गौमाता का महत्त्व और अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन
जबलपुर दर्पण। ग्वारीघाट स्थित कुंभ मेला मैदान में चल रही श्रीराम कथा के नवम दिवस पर पुराण मनीषी आचार्य कौशिक जी महाराज ने भारतीय संस्कृति की वर्ण व्यवस्था पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पौराणिक काल से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र वर्ण व्यवस्था कर्म के अनुसार थी, लेकिन समय के साथ इसे जाति व्यवस्था में बदलकर राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाया गया। आचार्य जी ने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने शिष्यों को राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा हेतु त्याग और बलिदान की भावना सिखाएं। धर्मानुसार कर्म करने से जीवन में उन्नति संभव है, और भगवान श्रीराम की शिक्षाओं को आत्मसात करके व्यक्ति बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्त कर सकता है।
आचार्य कौशिक जी ने भगवान श्रीराम के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में समर्पण और वैदिक आचरण का पालन आवश्यक है। श्रीराम और सीता के दांपत्य जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समर्पण से जीवन सुखमय और खुशहाल बन सकता है।
आचार्य कौशिक जी महाराज ने गौमाता को सर्ववेदमयी और गौलक्ष्णा बताया। उन्होंने कहा कि गौमाता में सभी देवताओं का वास होता है, और पंचगव्य का उपयोग मानव को निरोगी बना सकता है। गौमाता के संरक्षण हेतु श्री अतिरुद्र समन्वय चंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। पं. रामदेव शास्त्री के अनुसार, महाकौशल क्षेत्र के साथ-साथ देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। नर्मदा मैया की गोद में मंत्रोच्चार के साथ वैदिक परंपराओं के अनुसार यज्ञ में आहुतियां दी जा रही हैं। यह महायज्ञ 21 अक्टूबर तक अनवरत चलेगा, जिसमें रूद्री पाठ और महारुद्राभिषेक भी शामिल है।
श्रीराम विवाहोत्सव में उल्लासपूर्ण वातावरण
श्रीराम विवाहोत्सव के अवसर पर व्यास पीठ का पूजन पं. रामदेव शास्त्री और अन्य श्रद्धालुओं द्वारा किया गया। भक्तों ने श्रीराम बारात के उत्सव में भाग लिया और आनंदमय वातावरण का अनुभव किया। श्रीराम कथा का वाचन आचार्य कौशिक जी महाराज द्वारा दोपहर 2 बजे से किया जाएगा, जिसके बाद अतिरुद्र समन्वय चंडी महायज्ञ में आहुतियां और महारुद्राभिषेक होगा।



