गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ की बैठक में गोंडी संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा

जबलपुर दर्पण। गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ, जबलपुर के संभागीय अध्यक्ष किशोरी लाल भलावी की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक गोंडवाना चौक स्थित राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमा स्थल पर आयोजित हुई।
बैठक का मुख्य विषय था राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जनजाति संग्रहालय के उद्घाटन पर आदिवासी संगठनों और प्रतिनिधियों को आमंत्रित न किए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त करना। इस पर गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ और अन्य सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज किया और इसकी निंदा की।
साथ ही, मदन महल किले की भूमि को लेकर भी चर्चा हुई, जिसे गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ द्वारा रिक्त कराया गया था। इस भूमि पर शासन द्वारा स्मारक और अन्य योजनाओं को चलाए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा, गोंडी संस्कृति और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण के लिए एक गोंडवाना संस्कृति विश्वविद्यालय या महाविद्यालय खोलने का प्रस्ताव भी सामने आया, ताकि गोंडी संस्कृति को सहेजा जा सके और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक रविवार को प्रतिमा स्थल पर विशेष पूजन-अर्चन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी आदिवासी समुदाय के लोगों से सपरिवार सम्मिलित होने की अपील की गई।
बैठक में उपस्थित प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं में जिलाध्यक्ष नेम सिंह मरकाम, अजय झारिया, एम एल मर्सकोले, उत्तम सिंह ताराम, भिंडरा वाले राजा कुंवर नितेश प्रताप सिंह, वीरेंद्र पटेल, संजय उइके, दिशा इनवाती, अंजना इनवाती, एडवोकेट रवि चौधरी, सम्यक बौद्ध, बालकृष्ण उइके, पंडा बाल सिंह मरावी, प्रदीप ठाकुर, नोखेलाल बरकड़े, राम धुर्वे, सुभाष गोंटिया, अमृतलाल सेन आदि शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन अजय झारिया ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव गया प्रसाद धुर्वे ने व्यक्त किया। इस बैठक ने आदिवासी समुदाय के सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर एकजुटता का संदेश दिया और आगे के आयोजनों के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।



