सत्संग की अद्भुत महिमा पर आचार्य दिनेश गर्ग का प्रेरणादायक संदेश

जबलपुर दर्पण । शिवशक्ति सेवा समिति और शांतम प्रज्ञा आश्रम द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य दिनेश गर्ग ने संतों और महापुरुषों के जीवन के महत्व को उजागर किया। इस अवसर पर आचार्य जी ने कहा कि जीवन में एक अच्छा महापुरुष मिलने से इंसान के जीवन में अद्भुत बदलाव आ सकता है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर अजामिल की कथा सुनाई, जिसमें अजामिल ने अपने बेटे का नाम “नारायण” पुकारा, और उसी नाम के प्रभाव से उसे प्रभु की कृपा प्राप्त हुई। आचार्य जी ने कहा, “अगर प्रभु का नाम सच्चे मन से लिया जाए तो वह हमें हर परिस्थिति से उबार सकते हैं।”
प्रहलाद भक्त के अद्भुत प्रसंग पर चर्चा करते हुए आचार्य जी ने कहा कि भगवान सर्वत्र विद्यमान हैं। जब हिरण्यकश्यपु ने प्रहलाद से पूछा कि “तेरा भगवान कहां है?”, तो प्रहलाद ने जवाब दिया कि “मेरा भगवान हर जगह है, यहां तक कि इस खंभे में भी।” इसके बाद भगवान नरसिंह ने खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यपु का वध किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। गजेंद्र मोक्ष की कथा के माध्यम से आचार्य जी ने बताया कि जब गजेंद्र ने प्रभु को सच्चे दिल से पुकारा, तो न केवल गजेंद्र, बल्कि उसके साथ संघर्ष कर रहे ग्राह को भी मुक्ति मिली। यह कथा हमें यह सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों की समस्याओं का समाधान अपने तरीके से करते हैं, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। आचार्य जी ने समुद्र मंथन, बलि वामन और भगवान राम के लीलाओं का भी विस्तार से वर्णन किया, जिनमें भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा और अधर्म का नाश किया। श्री कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए आचार्य जी ने कहा कि जब भगवान पृथ्वी पर अवतरित होते हैं, तो सम्पूर्ण प्रकृति उनके स्वागत में समर्पित हो जाती है, और उनका आगमन हर जगह आनंद और आशीर्वाद का कारण बनता है। इस आयोजन में समाजसेवियों और भक्तों की उपस्थिति में भक्तों ने आचार्य जी की प्रवचन शैली को सराहा। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में गणेश पटेल, पिंटू रुपेश पटेल, नवीन पटेल, नीलेश सोनी, विनोद पटेल, सुनील पटेल, अभिषेक कोरी, प्रदीप मिश्रा और अन्य भक्तगण शामिल थे। इस कथा के माध्यम से भक्तों ने जीवन में भक्ति और साधना के महत्व को समझा और उसे आत्मसात किया।



