मध्य प्रदेशसीधी दर्पण

बीमार स्वास्थ्य सिस्टम को हैं खुद उपचार की जरूरत,जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल

सीधी जबलपुर दर्पण । खड्डी अंचल के युवा समाजसेवी विनय पांडेय अंकुश मोहनी ने कहा कि अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए होते हैं, लेकिन सीधी के सरकारी अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है, भीषण गर्मी के बीच जिले में बढ़ी बीमारियों के बीच अस्पताल में मरीजों के इलाज कि उचित व्यवस्था तक नहीं है, अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण मरीज फर्श पर ही लेट कर ही इलाज कराने को मजबूर हैं, वहीं फर्श पर मरीजों का इलाज होने के चलते उन्हें दूसरे मरीजों से भी इन्फेक्शन फैलने का डर सता रहा है, अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की खस्ताहाल के कारण मरीजों और परिजनों को परेशानियों की मार झेलनी पड़ रही है।
श्री पांडेय ने कहा कि लगभग चार सौ बिस्तर का अस्पताल, फिर भी समस्या बरकरार, कहने के लिए तो सीधी जिला अस्पताल चार सौ बिस्तर का अस्पताल है, इसके बावजूद भी मरीज़ को बेड की सुविधा नहीं मिल रही है, जिले के ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद मरीज की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ रही है, कि यहां के हाल बेहाल हैं, मरीज अस्पताल के बने बरामदे में ही बोतल और इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं, इतना ही नहीं इस भीषण गर्मी में तपती फर्श पर बिना चादर और कंबल के ही मरीज लेटे हुए नजर आ रहे हैं, ऐसे में मानवीय संवेदनाएं भी लगातार प्रभावित हो रही हैं, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब तबके के लोग चौबीस घंटे इसी फर्श पर लेट कर उपचार कराने को मजबूर हैं।
मरीजों को जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा -जिला अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजनों को अब जनप्रतिनिधियों से व्यवस्था सुधार की अपेक्षा है, श्री पांडेय ने कहा कि जिला अस्पताल में वार्ड और बेड की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को फर्श पर लेट कर उपचार कराने को मजबूर ना होना पड़े और बेहतर उपचार सुविधा मिल सके, फर्श पर चौबीस घंटे बिना कंबल-चादर के मरीजों के पड़े रहना शासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर रही है, हर दिन यहां सैकड़ों की संख्या में मरीज फर्श पर लेटकर उपचार कराते हैं, भीषण गर्मी में वैसे भी लोगों का जीवन संकट में है और बीमार व्यक्ति यहां स्वास्थ्य सुधार के बजाय और दूसरी बीमारी हो जा रही है, श्री पांडेय ने कहा कि जिले के सांसद, विधायक भी जिला अस्पताल की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. ऐसे में अस्पताल की स्थितियां दिनबदिन बदहाल होते जा रही है।
गंभीर मरीजों के लिए नीचे नहीं है, व्यवस्था -अस्पताल में भर्ती होने के लिए आने वाले गंभीर मरीजों के उपचार व्यवस्था के लिए प्रथम तल पर जाना पड़ता है, ऐसे में समय भी लगता है और परेशानी भी होती है, श्री पांडेय का कहना है कि अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर ही गंभीर मरीजों की उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आने-जाने में परेशानी कम हो और गंभीर मरीजों को वार्ड में जल्दी शिफ्ट भी किया जा सके. कई दशक पहले बने इस जिला अस्पताल का कायाकल्प हुआ, लेकिन आवश्यकता के अनुरूप इसका विकास नहीं हो सका, जिसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88