एनपीएस और यूपीएस के खिलाफ गूंजा आवाज ,ओपीएस बहाली को बताया संवैधानिक अधिकार

जबलपुर दर्पण । जीसीएफ जबलपुर स्थित ऑफिसर मेस में समस्त यूनियनों व एसोसियशनों के सहयोग से एन.पी.एस. एवं यू.पी.एस. पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें एन. पी. एस. यू.पी.एस. एवं ओ. पी.एस. को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की चिंताओं, अपेक्षाओं एवं सुझावों पर गहन मंथन किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय मंजीत सिंह पटैल, अध्यक्ष, ऑल इंडिया एन. पी. एस. एम्प्लॉई फेडरेशन ने कार्यशाला में यू.पी.एस. और एन.पी.एस. के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि शेयर बाजार पर आधारित दोनों ही पेंशन स्कीम चाहे वह एन.पी.एस. हो या यू.पी.एस. हो, यह किसी भी हिसाब से कर्मचारियों के हित में नहीं है। फिर चाहे केन्द्र सरकार इसको कितना ही अच्छा बताकर प्रचार-प्रसार करने की कोशिश करले आज कर्मचारियों की एकता व उनके आंदोलन का परिणाम है कि सरकार यू.पी.एस. में भी सुधार कर ओ. पी. एस. में मिलने वाली सुविधाएँ जोड. रही हैं जैसे अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन की गारंटी, ग्रेज्यूटी, फेमिली पेंशन आदि । परन्तु अभी भी यू.पी.एस. में कई कमियां हैं। जिसके कारण से कर्मचारियों को यू.पी.एस. तब तक मंजूर नहीं होगी, जब तक इसमें बचे हुए आवश्यक सुधार नहीं किये जाते जैसे कि- सेवा निवृत्ति पर कर्मचारियों के अंशदान का ब्याज सहित पूर्ण भुगतान किया जाना चाहिए। स्वेच्छिक सेवा-निवृत्ति दिनांक से ही पेंशन का भुगतान का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारी ही राष्ट्र निर्माण की नींव हैं और यदि कर्मचारी स्वयं असुरक्षित अनुभव करेगा, तो कोई भी संगठन या सरकार दीर्घकालिक सफलता प्राप्त नहीं कर सकती। कार्यशाला में भारी संख्या में उपस्थित सभी यूनियन प्रतिनिधियों, एसोसियेशन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों/अधिकारियों ने इस आयोजन को पूरी तरह सफल बताया एवं पूरानी पेंशन को कर्मचारियों को संवैधानिक अधिकार बताते हुए इसके लिए एकजुट प्रयास करने का आहवान किया ।



