गायत्री कथा सम्मान डॉ. तनूजा चौधरी को दिया

जबलपुर दर्पण। पाथेय साहित्य कला अकादमी द्वारा आयोजित गायत्री कथा सम्मान समारोह में सामाजिक चेतना के प्रति अपनी लेखनी से विशेष पहचान बनाने वाली कथा लेखिका डॉ. तनूजा चौधरी को वर्ष 2024 का गायत्री कथा सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. तनूजा चौधरी का समग्र लेखन समाज की समस्याओं, जीवन की विडंबनाओं और स्त्री अस्मिता के प्रति उनकी गहरी चिंता को व्यक्त करता है। उनके लेखन में नई पीढ़ी के भटकाव और समाज की परिस्थितियों का विश्लेषण प्रमुख रूप से देखने को मिलता है।
गायत्री कथा सम्मान समारोह में अतिथियों ने डॉ. तिवारी की रचनाओं के प्रभाव और उनके समाज के अंतिम वर्ग की रक्षा हेतु किए गए सृजन पर चर्चा की। डॉ. तिवारी ने हमेशा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए अपने लेखन का इस्तेमाल किया और यह सृजन समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित हुआ।
इस अवसर पर डॉ. तनूजा चौधरी को नगद राशि, मानपत्र और शाल के साथ सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान डॉ. भावना शुक्ला, प्रेमनारायण शुक्ला (नई दिल्ली), जगदीश कंथारिया (किशनगढ़), डॉ. हर्ष तिवारी, और प्रियम तिवारी द्वारा प्रदान किया गया।
समारोह में विविध क्षेत्रों में सक्रिय राजेंद्र मिश्रा, नीलेश रावल, डॉ. नीना उपाध्याय, इंजि. दुर्गेश व्यौहार दर्शन, समर सिंह, डॉ. मंजू गोरे, दीपचंद विनोदिया, मेहेर प्रकाश उपाध्याय, और रामकिशोर सोनी को उनकी बहुआयामी सेवाओं के लिए गायत्री विविधा सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके अलावा, ब्राह्मण स्वयंवर संस्कार महासभा एवं सुप्रभातम संस्था के पदाधिकारियों को सामाजिक जागृति के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. स्वाति सदानंद गोडवोले (पूर्व महापौर) थीं, और अध्यक्षता महाकवि आचार्य भगवत दुबे ने की। सारस्वत अतिथि के रूप में प्रो. अलकेश चतुर्वेदी (अध्यक्ष, पाठ्य पुस्तक स्थायी समिति) और डॉ. स्मृति शुक्ला (प्राचार्य, मानकुंवर महाविद्यालय) उपस्थित थीं।
इस समारोह में कई प्रमुख जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जिनमें मथुरा जैन, राजेंद्र तिवारी, सुभाष शलभ, संतोष नेमा, विजय अनुज, गणेश प्यासा, अर्चना मलैया, और छाया त्रिवेदी शामिल थे। संचालन का कार्य राजेश पाठक प्रवीण ने किया, और समारोह का आभार डॉ. भावना शुक्ला ने व्यक्त किया। समारोह ने समाज के लिए प्रेरणादायक कार्यों को मान्यता दी और सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।



