प्रभारी कार्यपालन यंत्री की मनमानी से बिगड़ी पीएचई की व्यवस्था

सीधी जबलपुर दर्पण । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग सीधी की बागडोर प्रभारी कार्यपालन यंत्री के हांथों में होने से विभागीय व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। सबसे ज्यादा प्रभाव खराब हैंडपंपों के सुधाार में लापरवाही के रूप में सामने आ रहा है। विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री त्रयंबकेश द्विवेदी हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एसडीओ से कार्यपालन यंत्री का प्रभार मिलने के बाद वह अब स्वयं को स्थाई कार्यपालन यंत्री के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका यह व्यवहार सेवा नियमों के उल्लंघन के रूप में माना जा रहा है। साथ ही अन्य अधीनस्त अमले पर वह स्वयं को हावी करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कार्यालय में उनकी मौजूदगी नाममात्र के लिए रहती है। कभी-कभार कुछ घंटे के लिए आते हैं फिर गायब हो जाते हैं। शिकायतकर्ताओं को उनसे मिलने का अवसर ही नहीं मिल पाता। जिले में करोड़ों की लागत से संचालित नल जल योजना और हैंडपंप मरम्मत कार्यों में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। कई ग्रामीण इलाके में नल जल योजना की पाइप लाइन अधूरी है। जिसके चलते लोगों को नलों से पानी नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि आधे-अधूरे कार्य के बाद भी ठेकेदारों को पूरा भुगतान हो चुका है। कार्यपालन यंत्री की लापरवाही के चलते कई सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों में बिगड़े हैंडपंपों का सुधार कार्य महीनों बाद भी नहीं हो पा रहा है। ठंड के दिनों में भी स्कूली बच्चों और ग्रामीण बच्चों को पानी के लिए जद्दोजेहद करनी पड़ रही है। दरअसल सरकारी हैंडपंपों का जाल सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में फैला हुआ है। गांवों के लोग भी अब पानी के लिए पूरी तरह से सरकारी हैंडपंप पर ही आश्रित हैं। कुछ समय से सरकारी हैंडपंपों के बिगडऩे पर उनका सुधार कार्य समय पर हो पाना संभव नहीं है। लोग बिगड़े हैंडपंपों के सुधार के लिए आवेदन लेकर जिला मुख्यालय तक आते हैं फिर भी उनका सुधार कार्य नहीं हो पाता। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिगड़े हैंडपंपों का सुधार न होने को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें बनी हुई हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग जिसका प्रमुख कार्य लोगों को आसानी से पेय जल सुविधा उपलब्ध कराना है वह अपने कार्यों के प्रति इतना ज्यादा लापरवाह कैसे हो गया। वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि अधिकारी के द्वारा हैंडपंपों के सुधार कार्य में रुचि न लिए जाने के कारण इस तरह की शिकायतें बनी हुई हैं।
तेंदुआ स्कूल में खराब पड़ा है हैंडपंप-जिला मुख्यालय के समीपी शासकीय हाई स्कूल तेंदुआ में हैंडपंप खराब हैं। कई बार शिकायत के बाद भी बिगड़े हैंडपंप का सुधार कार्य कराने की जरूरत नहीं समझी जाती। लिहाजा छात्र-छात्राओं को प्यास बुझाने के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह सीधी जिले के कई सरकारी स्कूलों में लगा हैंडपंप महीनों से बिगड़ा है लेकिन शिकायत के बाद भी उनका सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। कार्यपालन यंत्री को यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए कि सरकारी स्कूलों एवं सार्वजनिक स्थलों में लगे हैंडपंपों के बिगडऩे पर उनकी जल्द से जल्द मरम्मत हो जाए। फिर भी यदि कोई कार्यपालन यंत्री से कार्यालय में आकर मिलना चाहे तो वह भी संभव नहीं हो पाता। प्रभारी कार्यपालन यंत्री से संपर्क करने के लिए कार्यालय में जहां अवसर नहीं मिलता वहीं फोन पर भी संपर्क नहीं हो सकता। उनके द्वारा फोन काल भी रिसीव नहीं किया जाता। ऐसे में विभागीय कार्य लगातार पटरी से उतरे हुए हैं।



