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पिता ही निकला अपनी बच्ची का हत्यारा

दीपक तिवारी जबलपुर। उसने इस दुनिया में केवल 22 महीने ही बिताए थे और वह अपने पिता के गुस्से का शिकार हो गई। महज 22 माह की मासूम देविका की निर्मम हत्या की खबर जिसने भी सुनी उसका ह्रदय द्रवित हो गया लगा मानो किसी ने अपने ही कलेजे के टुकड़े को समाप्त कर दिया हो। पुलिस की जांच में अब इस मामले की सच्चाई खुलकर सामने आ गई है 22 माह की मासूम देविका का पिता सुदर्शन की उसका हत्यारा निकला। घटना का कारण केवल इतना था कि वह उसकी मां पर शक किया करता था। उससे बात बात पर लड़ाई झगड़ा किया करता था। उसे इस बात का भी संदेह था कि देविका उसकी बेटी है भी या नहीं। लेकिन इन तमाम सवालों के मद्देनजर मासूम देविका का क्या कसूर था। इस मामले का पटाक्षेप करते हुए जबलपुर एसपी अमित सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि थाना तिलवारा में दिनांक 17/1/2020 को दोपहर अचानक 12:30 बजे तिलवारा स्थित भैरो नगर निवासी 39वर्षीय सुदर्शन बाल्मीकि ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि विगत रात्रि 11:00 बजे जब उसका परिवार खाना खाकर सो गया था तब अचानक 2:00 बजे उसकी बच्ची कुमारी देविका जो महज 22 माह की थी, उसने उठने की कोशिश की उसे पुनः सुला दिया गया। सुबह 8:00 बजे जब उसकी पत्नी और वह सो कर उठे तो देखा बच्ची घर पर नहीं थी। सामने का दरवाजा खुला हुआ था। पत्नी ने मोहल्ले में काफी तलाश किया मगर बच्ची का कोई पता नहीं लगा। रिपोर्ट धारा 363 के तहत दर्ज हुई और पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शिव सिंह बघेल, नगर पुलिस अधीक्षक बरगी आर एस चौहान के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी रीना पांडे के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और थाने के स्टाफ के साथ एक टीम गठित की गई। टीम के द्वारा गांव के आसपास सुनसान निर्णयन क्षेत्रों में तलाश की गई साइबर सेल और फॉरेंसिक लैब के साथ-साथ डॉगस्क्वाड की भी मदद ली गई। पतासाजी के दौरान यह पता चला कि 26-02-2019 को मोहल्ले के छोटे बच्चों को नई बस्ती भैरव नगर में कुएं के पानी में किसी अज्ञात का शव दिखा। सूचना पाकर जब शव को पुलिस द्वारा बाहर निकलवाया गया तब शव लगभग 15 किलो के वजनी पत्थर से बंधा पाया गया। शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी। परिजनों द्वारा देविका के रूप में उसकी पहचान की गई। पंचनामे की कार्यवाही के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। जांच में धारा 364 302 201 का इजाफा हुआ। जांच के दौरान 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और संदेही के तौर पर बच्ची का पिता सुदर्शन और मोनू बाल्मीकी पाया गया। उसकी पत्नी द्वारा बताया गया है मोनू उर्फ सुदर्शन बाल्मीकि उस पर शक करता था उसे यह भी लगता था कि देविका उसकी बेटी ही नहीं है। देविका के लगातार बीमार रहने के कारण भी चिड़चिड़ाता था। घटना वाली दिनांक को भी जब उसने पति को बताया कि देविका की तबीयत खराब है उसने बोला कि मैं आकर टंटा ही खत्म कर देता हूं। पति द्वारा पत्नी के पेट में पल रहे बच्चे को भी मारने की धमकी दी गई। जिसके के कारण उसने किसी को कुछ नहीं बताया। देविका का हत्यारा पूर्व में भी थाना भेड़ाघाट में बलात्कार केस प्रकरण में गिरफ्तार हो चुका है। फिलहाल इस मामले में सलाखों के पीछे है। इस पूरी कार्यवाही के दौरान सउनि. राजेश शुक्ला, प्रधान आरक्षक धनंजय सिंह, विजय शुक्ला, प्रमोद पांडे, आरक्षक महेंद्र पटेल, ब्रह्म प्रकाश, बीरबल, उपेंद्र गौतम, प्रेम विश्वकर्मा, रामगोपाल, खुमान, राममिलन, ज्ञानेंद्र पाठक, जितेंद्र दुबे, नितिन जोशी, तथा थाना तिलवारा के सउनि. विनोद द्विवेदी प्रधान आरक्षक श्रीकांत मिश्रा, दयाशंकर, बेनी प्रसाद, अनिल सिंह, गोविंद सिंह, राजेंद्र गौतम, आरक्षक हरीश, जयकुमार, रमेश, यशवंत, हरि सिंह, वीरेंद्र सिंह, सुरेंद्र, उदय, प्रह्लाद, मनीष, दुर्गेश, महिला आरक्षक सोनाली का विशेष योगदान रहा।

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