जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

पुलिस कस्टडी से अपराधियों के भागने के मामले में आरोपित आरक्षक को नही मिली राहत

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस कस्टडी से अपराधियों के भागने के मामले में आरोपित आरक्षक को राहत देने से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने साफ किया कि ड्यूटी के दौरान आरक्षक को सावधान व सतर्क रहना चाहिए था। यह कहना अनुचित है कि याचिकाकर्ता आरक्षक को असंगत या अनुपातहीन सजा दी गई है। अपराधियों को जेल से कोर्ट में पेश करने के नियमों का पूरा पालन किया गया था। ड्यूटी के दौरान लापरवाही से ही उक्त घटना हुई। इस मत के साथ कोर्ट ने आरक्षक की याचिका निरस्त कर दी।

आरक्षक रमाकांत दुबे ने 2007 में याचिका दायर कर बताया कि पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसे अनुपातहीन यानी बड़ी सजा दी गई है। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता यश सोनी ने बताया कि 28 जनवरी, 1997 में रमाकांत दुबे व दो अन्य आरक्षकों को तीन अपराधियों को जबलपुर जेल से कटनी कोर्ट में पेश कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लौटते समय कटनी रेलवे स्टेशन पर आरोपितों ने बाथरूम जाने का बहाना किया और जैसे ही हथकड़ी खोली गई, तीनों भाग गए। इनमें से एक पकड़ा गया। रमाकांत के खिलाफ ड्यूटी में लापारवाही बरतने को लेकर चार्जशीट पेश की गई। बाद में पुलिस अधीक्षक ने 20 अगस्त 1997 को सेवा से बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में आईजी की भी उस रिपोर्ट को माना जिसमें बताया गया कि आरोपित को पहले भी ऐसे ही मामले में सजा दी जा चुकी थी।

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