उमरिया दर्पण

ऊर्जा संरक्षण की सीख देने वाले अधिकारियों के लिए दोहरे मापदंड क्यों?

सतीश चौरसिया उमरियापान। देशभर में ऊर्जा संरक्षण और पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं । सिलौंडी के नायब तहसीलदार खगेश भलावी द्वारा प्रतिदिन लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलकर उप तहसील कार्यालय पहुंचना निश्चित रूप से सराहनीय पहल है । उनका यह कदम आमजन को पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और ईंधन बचत का व्यवहारिक संदेश दे रहा है । नायब तहसीलदार खगेश भलावी का कहना है कि प्रत्येक नागरिक को पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग कम करना चाहिए और छोटी दूरी के लिए पैदल चलने की आदत अपनानी चाहिए । उनके इस प्रयास की क्षेत्र में लोग प्रशंसा भी कर रहे हैं । लेकिन दूसरी ओर सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब एक अधिकारी स्वयं ऊर्जा संरक्षण का संदेश देते हुए पैदल कार्यालय पहुंच सकते हैं, तो कई अन्य अधिकारी-कर्मचारी प्रतिदिन अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तक “अप-डाउन” कर सरकारी संसाधनों और ईंधन की खपत क्यों बढ़ा रहे हैं । स्थानीय लोगों का कहना है कि जनपद पंचायत सहित विभिन्न विभागों में पदस्थ कई अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करते और रोजाना दूर-दराज से निजी वाहनों द्वारा आवागमन करते हैं । इससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ती है, बल्कि समय पर कार्यालय संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है । लोगों का कहना है कि यदि शासन ऊर्जा संरक्षण और मुख्यालय निवास संबंधी नियमों को गंभीरता से लागू करना चाहता है, तो केवल संदेश देने तक सीमित न रहकर नियमित अप-डाउन करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए । इससे प्रशासनिक अनुशासन मजबूत होगा और ऊर्जा बचत के संदेश को वास्तविक प्रभाव मिलेगा ।

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