स्वच्छ सर्वेक्षण के दावों पर सवाल: नालियों से निकली सिल्ट नहीं उठी, माता गुजरी कॉलेज में कचरे के ढेर से छात्राएं परेशान

जबलपुर दर्पण । शहर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नगर निगम के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। कई क्षेत्रों में नालियों की सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट और कचरे का समय पर उठाव नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का आरोप है कि सफाई कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण बारिश में वही मलबा दोबारा नालियों में पहुंच रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार दवा बाजार क्षेत्र में हाल ही में नालियों की सफाई कराई गई थी, लेकिन कई दिनों तक सिल्ट का उठाव नहीं किया गया। इसी तरह तुलाराम चौक स्थित एसबीआई बैंक के सामने तथा सिविक सेंटर क्षेत्र में भी नालियों से निकाला गया मलबा सड़क किनारे ही छोड़ दिया गया, जो बारिश के कारण वापस नालियों में समा गया।सबसे गंभीर स्थिति माता गुजरी कॉलेज परिसर में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज परिसर में स्थित कचरा संग्रहण स्थल से लंबे समय से कचरा नहीं उठाया गया है। कचरे के कारण आसपास दुर्गंध फैल रही है। इसी स्थान के समीप सुरक्षा गार्ड बैठते हैं और छात्राएं भी भोजन करती हैं, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कचरा उठाने के लिए सफाई कर्मियों द्वारा 400 से 500 रुपये की मांग की जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही “चाय-पानी” के नाम पर 100 रुपये दिए हैं, लेकिन अतिरिक्त राशि नहीं देने पर कचरे का उठाव नहीं किया जा रहा। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और नगर निगम की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि हाल ही में स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत शहर में वॉल पेंटिंग और स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया था। लेकिन माता गुजरी कॉलेज परिसर में कचरे के ढेर और विभिन्न क्षेत्रों में अधूरी सफाई व्यवस्था को देखकर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजी दावों तक सीमित नजर आ रहा है। नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि नालियों की सफाई के बाद मलबे का तत्काल उठाव सुनिश्चित किया जाए, कॉलेज परिसर से नियमित कचरा हटाया जाए तथा सफाई व्यवस्था की प्रभावी निगरानी कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।



