देश को आज भी गांधी के सिद्धांतों की प्रासंगिकता है

जबलपुर दर्पण । महात्मा गांधी ऐसे चिराग हैं जिन्होंने अपने विचारों से पूरे विश्व को प्रकाशमान किया। गांधीजी ने अहिंसा के अस्त्र से भारत को स्वतंत्रता दिलाई। आज देश को एक बार फिर गांधीवाद की आवश्यकता है। सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर ही समाज को स्वार्थ, सत्ता-लोलुपता एवं नैतिक पतन से बचाया जा सकता है। यही आज के समय में गांधीजी के विचारों की वास्तविक प्रासंगिकता है। यह विचार पूर्व मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया ने गांधी संवाद परिषद द्वारा शहीद स्मारक में आयोजित “एक शाम गांधी के नाम” कार्यक्रम में आयोजित संगोष्ठी “आज के युग में गांधी : विचार, व्यवहार और भविष्य” विषय पर मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कटनी से पधारे वरिष्ठ पत्रकार नंदलाल सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी विश्व के उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, लेकिन स्वयं सत्ता से सदैव दूर रहे। उन्होंने कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ताओं को सत्ता के बजाय समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। जयप्रकाश नारायण एवं विनोबा भावे जैसे महान व्यक्तित्व गांधीजी की इसी प्रेरणा के उदाहरण हैं। इस अवसर पर के.के. अग्रवाल, देवेंद्र दुर्जन, राजेंद्र चंद्रकांत राय, विवेक चतुर्वेदी, पीयूष श्रीवास्तव एवं बसंत मिश्रा अमरीश मिश्रा , विक्रम सिंह, विवेक पटेल, रितेश अग्रवाल, रमेश बड़कुल, मुकेश रघुवर पटेल, सुरेंद्र जैन, अजय जैन, संतोष पंडा, अयोध्या तिवारी, सतीश तिवारी, रविन्द्र गौतम, अभिषेक यादव, मौली जैन निशा चौधरी, शैलजा जैन, शोभा सिंघई, वंदना जैन, शीला पटेल, कमलेश यादव, इंदिरा पाठक तिवारी, गीता शरत तिवारी, संगीता सिंह, प्रमोद शुक्ला, चतुर सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय रूपेंद्र पटेल एवं डॉ प्रशांत मिश्रा ने कराया।
कार्यक्रम का संचालन अनुराग जैन गढ़ावाल ने तथा आभार प्रदर्शन बबुआ शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों का शॉल, गांधी मोमेंटो एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।



