गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा एक्ट 2026 पर विरोध जताया

जबलपुर दर्पण । महाराष्ट्र सरकार द्वारा सिक्खों के पांच पवित्र तख्तों में से एक तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब, नांदेड़ के प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले 70 साल पुराने नांदेड़ सिख गुरुद्वारा एक्ट 1956 को समाप्त कर उसके स्थान पर गुरुद्वारा एक्ट 2026 को लागू करने के प्रस्ताव का विरोध देशभर के सिख समाज द्वारा लगातार किया जा रहा है। इस श्रृंखला में रविवार की शाम जबलपुर सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा एक वृहत्त बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने उक्त एक्ट का पुरजोर विरोध करते हुए मा.प्रधानमंत्री जी के नाम ऑन लाइन ज्ञापन भेजकर पुराने एक्ट 1956 को यथावत रखने की मांग की । ज्ञापन में नए एक्ट को धार्मिक भावनाओं एवं ऐतिहासिक परंपराओं के खिलाफ बताया गया। ज्ञापन की प्रतिगृह मंत्री श्री अमित शाह, मा. राज्यपाल, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र,प्रमुख सचिव एवं अध्यक्ष शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर, पंजाब आदि को भी प्रेषित की गई है। इस मौके गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री रजिंदर सिंह छावड़ा, महासचिव मंजीत सिंह ननडा, प्रताप सिंह विरदी, काके आनंद,एच एस ब्रोका, अधिवक्ता एन एस रूपराह, मंजीत सिंह बेदी, रणजीत सिंह भोमराह, मनमोहन सिंह सलूजा, जतिंदर सिंह सैनी, अमरजीत सिंह धन्जल, प्रिंस भसीन, ,सरबजीत सिंह रील, हरजीत सिंह सूदन, जालम सिंह एवं करनैल सिंह छाबड़ा के साथ ही सिख समाज की धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक, संस्थाओं के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे । अधिवक्ता एन एस रूपराह एवं जतिंदरपाल सिंह ओबेरॉय ने नए कानून की व्याख्या और समीक्षा करते हुए कानून को सिख गुरुद्वारा, और सिख मर्यादा के खिलाफ बताया। कार्यक्रम का संचालन सचिव मंजीत सिंह ननडा ने किया ।



