राज्य वन सेवा भर्ती रिट अपील के अधीन

जबलपुर दर्पण । मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य वन सेवा भर्ती परीक्षा 2023 में, विदिशा निवासी याचिका कर्ता विक्रांत सिंह चौधरी द्वारा प्रारंभिक परीक्षा के दो प्रश्न पर आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन आयोग ने उक्त प्रश्नों के, मान्य किए गए बिकल्पो में सुधार नहीं किया तथा वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया गया | आवेदक दो अंको से प्रारंभिक परिक्षा में फ़ैल कर दिया गया | आवेदक द्वारा आयोग के उक्त कृत्य को हाईकोर्ट में याचिका दायर करके चुनोती दी गई | हाईकोर्ट की सिंगल बैंच द्वारा याचिका कर्ता को मुख्य परीक्षा में शामिल करने का अंतरिम आदेश पारित किया गया | मुख्य परीक्षा में याचिकाकर्ता को सफल घोषित किया गया तथा उसे साक्षात्कार में शामिल किया गया, साक्षात्कार के पूर्व आवेदन की कंडिका क्रमांक 32 में बिचाराधीन याचिका का नियम विरूद्ध रूप से आयोग ने उल्लेख कराया तथा याचिका कर्ता को साक्षात्कार में मात्र 16 अंक प्रदान किए | याचिका की सुनवाई के दौरान लोक सेवा आयोग ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके मुख्य परिक्षा के 4 प्रश्नों को डिलीट करने का उल्लेख किया गया तथा उक्त प्रश्नों के 12 अंक याचिका कर्ता एवं अन्य को प्रदान करने की भी बात अपने शपथ पत्र में लेख की गई | याचिका की अंतिम सुनवाई में आयोग ने कोर्ट को बताया की याचिकाकर्ता मुख्य परीक्षा में तो पास है, लेकिन साक्षात्कार में फ़ैल है | जबकी नियमो में साक्षात्कार में पास होने के लिए मिनिमम अंक निर्धारित ही नहीं थे फिर भी हाईकोर्ट की सिंगल के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ द्वारा आयोग द्वारा बताए गए तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए याचिका ख़ारिज कर दी गई | तत्पश्यत याचिका कर्ता अपील की, जिसकी सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर तथा जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ द्वारा की गई | अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अभिलाषा लोधी एवं कृष्णा रोहडा एडवोकेट ने कोर्ट को, MPPSC की कार्यवाही से अवगत करते हुए बताया की आयोग की ओर से सिंगल बैंच को गलत स्टेटमेंट देकर, कि याचिकाकर्ता साक्षात्कार में फ़ैल बताया गया है | तथा रिट अपील लंबित रहने के दौरान याचिका कर्ता से साक्षात्कार में कम अंक प्राप्त करने बाले अभ्यर्थीयो को प्रतीक्षा सूची में से चयनित किया गया है, जबकि उक्त अभ्यर्थियों के कुल अंक अपीलकर्ता के अंको के बराबर है | कोर्ट को यह भी बताया गया की आयोग ने अपने हलफनामा/जबाब में मुख्य परिक्षा में डिलीट किए गए प्रश्नों के 12 अंक याचिकाकर्ता के प्रारंभिक परीक्षा के अंको में जोड़ना बताया गया है जबकि उक्त अंक मुख्य परिक्षा के अंको में जोड़ना चाहिए | कोर्ट को यह भी बताया गया की लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने बाली किसी भी चयन परिक्षा में साक्षात्कार में सफल होने के लिए मिनिमम अंक निर्धारित नहीं है और ना ही विवादित प्रश्नों को डिलीट करने पर आयोग के नियम में बोनस अंक प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है | डिविजन बैंच द्वारा लोक सेवा योग के उक्त कृत्य को गंभीरता से लेते हुए प्रतीक्षा सूची में से चयनित अभ्यर्थियों का रिकार्ड प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए तथा उक्त नियुक्तियों को अपील के निर्णयाधीन कर दी गई है।



