डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

नहीं जग रही प्रशान कुछ दिन पहले लगी ख़बर पर चुप्पी साधी अधिकारी और कर्मचारी

डिंडोरी जबलपुर दर्पण । डिंडोरी जिले में भ्रष्टाचार अब कैंसर की तरह फैल चुका है, जिसकी जड़ें बजाग जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत पिपरिया में हुए मजदूरी के नाम पर और सीसी रोड निर्माण कार्य में साफ दिख रही हैं। यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली लूट और जवाबदेह अधिकारियों की आपराधिक मिलीभगत का जीता-जागता प्रमाण है। जहां मजदूरी के नाम पर एक फर्जी टीन नम्बर वाला बिल में छलक रहा है, जिसमें मजदूरों की वेंडर आईडी बनाकर मजदूरों के अकाउंट में पैसा आना चाहिए था मगर फर्जी जीएसटी बिल लगा कर 77250 रुपए यादव कंट्रेशन के नाम से आहरण कर लिया है जबकि मजदूरी जीएसटी का 28 प्रसेंट है,वहीं पूर्व एक खबर प्रकाशित किया गया है जिसमें सीसी रोड निर्माण कार्य कराए बिना ही सचिव लक्ष्मण धुर्वे और सरपंच श्रीमती सरिता पट्टा के द्वारा बेशर्मी से पांच लाख रुपये अपने चाहते ठेकेदार यादव कंट्रेशन के नाम से फर्जी तरीके से बिल लगाया गया है। यह मात्र एक बिल नहीं, बल्कि जनता के पैसों पर डाका डालने का एक घिनौना षड्यंत्र है, जिसमें निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की सांठगांठ स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

झूठ का पुलिंदाः यादव कंट्रेशन मटेरियल सप्लायर का फर्जीवाड़ा, मजदूरी और मटेरियल लाखों की लूट, और GST चोरी का खेल

सूत्रों के द्वारा मिली जानकारी में आक्रोशित ग्रामीणो और अधिक चौंकाने वाली है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यादव कॉन्ट्रैक्शन मटेरियल सप्लायर नामक जिस फर्म के नाम पर यह बिल लगाया गया है, जो सरपंच सरिता पट्टा की रिश्तेदार है । यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह केवल कागजों पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब पता चलता है कि इसी तर्ज पर मजदूरी भुक्तान में भी हजारों के नहीं, बल्कि सीसी रोड बिना बनाए लाखों के फर्जी बिल सचिव लक्ष्मण धुर्वे और सरपंच श्रीमती सरिता पट्टा की मिलीभगत से निकाले गए हैं। मटेरियल खरीदी के नाम पर बिना मूल्यांकन और बिना सीसी जरी किए गए है भ्रष्टाचार अक्षम्य है, यह जनता के अधिकारों का सीधा हनन है!

इस पूरे खेल में, फर्जी बिल माफिया सक्रिय है, जो न सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है बल्कि GST की चोरी, कालाबाजारी और अन्य कई प्रकार की हेराफेरी करके समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा है। यह केवल एक पंचायत का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े वित्तीय अपराध सिंडिकेट का हिस्सा है, जिस पर तुरंत लगाम कसना बेहद जरूरी है।

जनपद प्रशासन की आपराधिक चुप्पीः भ्रष्टाचार का गढ़ बना जनपद पंचायत बजाग इंस्पेक्टर और ऑडिट टीम भी शक के घेरे में

सबसे बड़ा और तीखा सवाल बजाग जनपद पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर सवाल उठता है। आखिर उनकी ऐसी क्या मजबूरी है कि जनपद पंचायत बजाग क्षेत्र में फल-फूल रहे इस खुलेआम भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं कस पा रहे हैं? क्या उनकी निष्क्रियता ही इन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है,या अधिकारियों की आपराधिक चुप्पी का ही परिणाम है कि कई पंचायतों में फर्जी तरीके से बिल लगाया जा रहा है, जिसका भौतिक सत्यापन करने पर सत्यता से कोई वास्ता नहीं निकला, धड़ल्ले से पास किया जा रहा है। सूत्रों की जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले में जनपद पंचायत के खंड अधिकारी, पंचायत इंस्पेक्टर और वित्तीय ऑडिट करने वाली टीम भी शामिल हो सकती है। जो संस्थाएं और फर्मे अलग-अलग जगह से वित्तीय ऑडिट और निगरानी का कार्य करती हैं, उनका भी इस भ्रष्टाचार में शामिल होना एक गंभीर जांच का विषय है। यह प्रशासन की गहरी सांठगांठ और मिलीभगत की बू आती है। बजाग जनपद प्रशासन अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर, इन भ्रष्टाचारियों को खुली छूट दे रहा है, जिससे यह क्षेत्र भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। जनता का पैसा लूटा जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं। क्या बजाग जनपद प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए है या फिर वह इन भ्रष्टाचारियों के हाथों की कठपुतली बन चुका है? इस गंभीर मामले की उच्च-स्तरीय तकनीकी और वित्तीय जांच तथा दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। आखिर कब तक जनता के हक पर डाका डाला जाएगा और भ्रष्टाचारियों पंचायत के अधिकारियों का अजब गजब खेल चलता रहेगा?

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