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कोरोना लॉकडाउन में व्यापारियों को मिले राहत, जबलपुर चैम्बर ने की मांग
जबलपुर। कोरोना लॉकडाउन के चलते उद्योग-व्यापार का चक्र थम सा गया है, व्यवसायियों में पशोपेश है, सूक्ष्म व छोटे व्यापारियों में आर्थिक तंगी आ गयी है, घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है, कर्मचारियों के भत्ते व वेतन में मजबूरीवश कटौती की जा रही है तथा हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे समय सरकार को आगे बढ़कर व्यवसायियों का सहयोग करना चाहिए, उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, यह कथन है जबलपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का। देश में लगभग 40 दिन के लॉकडाउन के चलते नॉन कोरपोरेट सेक्टर को करीब 7 लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है जिसमें खुदरा व होलसेल व्यापारी, ट्रांसपोर्टर्स, स्टार्टअप्स, स्ट्रीट वेंडर्स, हॉकर्स आदि सम्मिलित हैं। चैम्बर ने व्यवसायियों के हितों के मद्देनज़र प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री, एमएसएमई मंत्री आदि को इस आशय का पत्र लिखा है जिसमें विभिन्न मांगें की गयी हैं।
1. तय तिथि को आगे बढ़ाना – जबलपुर चैम्बर के चेयरमैन प्रेम दुबे ने बताया कि जीएसटी व इन्कम टैक्स की सभी तय तिथियों को 31 अगस्त 2021 तक बढ़ाया जाये जिसमें टैक्स अथवा रिटर्न फाइल करना हो क्योंकि व्यवसायी वर्ग, कर सलाहकार, चार्टर्ड अकाउंटेंट इत्यादि कोरोना महामारी व लॉकडाउन से जूझ रहे हैं।
2. मोरेटोरियम की मांग – जबलपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि व्यवसायियों से लॉकडाउन की अवधि में बैंक ऋण पर ब्याज न लिया जाये। उन्होंने मांग की कि व्यवसायियों व देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए छह माह का मोरेटोरियम प्रदाय किया जाना बेहद आवश्यक हो गया है। हिमांशु खरे ने कहा कि सरकार को राहत पैकेज त्वरित जारी करना चाहिए जिससे व्यवसायियों का मनोबल न टूटे।
3. सिबिल स्कोर की महत्वता को शिथिल किया जाये – हिमांशु खरे ने बताया कि बैंकों व वित्तीय संस्थानों द्वारा सिबिल स्कोर के हिसाब से ही उपभोक्ताओं को ऋण जारी किया जाता है तथा ब्याज दर निर्धारित की जाती है। लॉकडाउन में अधिकांश व्यवसायियों से मासिक किस्त व ब्याज जमा करने में मजबूरीवश चूक हुई है। इसका सीधा असर उनके सिबिल स्कोर पर पड़ता है जिससे उन्हें भविष्य में नुक्सान उठाना पड़ता है। चैम्बर ने केंद्रीय वित्त मंत्री व आरबीआई गवर्नर से मांग की है कि लॉकडाउन व मोरेटोरियम की अवधि में सिबिल की महत्वता को शिथिल किया जाये।
4 . कोविड सॉफ्ट लोन – जबलपुर चैम्बर की व्यापार समिति के अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल ने दस करोड़ रूपये तक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के हितार्थ कोविड सॉफ्ट लोन जारी करने के मांग की जिसका ब्याज दर कम हो तथा आसानी से उपलब्ध हो सके।
5 . व्यापारियों को राहत पैकेज – जबलपुर चैम्बर के सचिव नरिंदर सिंह पांधे ने कहा कि गत वर्ष भी जब कोरोना काल में राहत पैकेज की घोषणा हुई थी, उसमें व्यापारियों को सम्मिलित नहीं किया गया था। राहत पैकेज सिर्फ एमएसएमई सेक्टर को प्रदान किया गया था। आज समय की मांग है कि व्यापारियों की सुरक्षा सरकार करे तथा उन्हें भी राहत मिले।
6 . लॉकडाउन अवधि में वेतन – जबलपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी अध्यक्ष कमल ग्रोवर ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि में कर्मचारियों का वेतन ईएसआई वेलफेयर फंड से प्रदान किया जाये जो कर्मचारीगण ईएसआई में पंजीकृत हैं। इससे नियोक्ता पर भार नहीं पड़ेगा तथा छंटनी व बेरोज़गारी पर भी अंकुश लगेगा। उन्होंने बताया कि ईएसआई वेलफेयर फंड में देश में करीब साठ हज़ार करोड़ रूपये जमा हैं जिससे यह कार्य किया जा सकता है।
7 . कोविड उपचार में सहायता – जबलपुर चैम्बर के कार्यसमिति सदस्य सी ए अनिल अग्रवाल ने सुझाव दिया व मांग की कि कोविड के इलाज में व्यापारियों को आयकर की धारा 80 डी के तहत अलग से रूपये डेढ़ लाख तक की छूट दी जाये जिसमें अस्पताल का खर्च, क्वारंटाइन की दवा, जाँच इत्यादि सम्मिलित हो। उन्होंने मांग की कि रूपये दस लाख से कम आय वाले व्यापारियों को अस्पताल खर्च में कम से कम 25 % की सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान हो जिससे व्यापारीवर्ग एवं मध्यम वर्ग को सम्बल प्राप्त हो सके।



