रोके गए डीए व वेतन-वृद्धि के लिए कर्मचारी अब आक्रोशित ट्विटर से आंदोलन का आगाज

मण्ड़ला। मध्यप्रदेश सरकार ने कोरोना काल में प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए प्रदेश के सभी कर्मचारियों के डीए और वेतन-वृद्धि में रोक लगा दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी कर्मचारियों ने सरकार के इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार करते हुए इसके अलावा अपने एक दिन का वेतन भी सरकार के खजाने में जमा कराया था। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों को अब तक डेढ़ से तीन लाख रुपए का नुक़सान हो चुका है अकेले शिक्षकों की देखें तो औसतन 9000 रुपये प्रतिमाह का नुकसान हो रहा है। आगे भी यह क्रम जारी रहने की संभावना है। ट्रायबल के शिक्षकों सहित कुछ अन्य कर्मचारियों के सातवें वेतनमान के एरियर भुगतान पर भी रोक लगी हुई है। कर्मचारियों के साथ ही आम नागरिकों को भी सरकारी मंदी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसी बीच सरकार ने अपने विधायकों, मंत्रियों के वेतन में वृद्धि करने के लिए समिति का गठन कर दिया, जिससे निश्चित रूप से माननीयों के वेतन में बिना बहस के मेज थपथपाकर सर्वसम्मति से बेहताशा वृद्धि होना तय है। जिसे देखते हुए कर्मचारी संगठनों में काफी रोष देखने को मिल रहा है। एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजीव सोनी ने विज्ञप्ति जारी करते हुए जानकारी दी कि वर्तमान में कोरोना संकट को देखते हुए प्रथम चरण में दिनांक 04/06/2021 को ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन सहित अन्य कर्मचारी संगठनों ने ट्वीटर के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी कर्मचारी दिनांक 04/06/2021 को सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री आदि को डीएइन्क्रीमेंट बहाल_करो ।
ट्वीट करके रोके गए डीए और वेतन-वृद्धि के लिए अपनी आवाज बुलंद करेंगे। ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डीके सिंगौर एवं सभी पदाधिकारियों ने प्रदेश के सभी शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों से अपील की है कि वे अपने हक के लिए अपने साथियों एवं परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक संख्या में #डीएइन्क्रीमेंटबहाल_करो को ट्वीट, री-ट्वीट करके सरकार तक अपनी जायज़ मांग के लिए आवाज बुलंद करें।



