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डेढ़ वर्षो से बंद ऐतिहासिक मंदिर का खुला ताला, भक्तों ने किया शिवजी का जलाभिषेक

नंदकिशोर ठाकुर,डिंडोरी ब्यूरो। जिला मुख्यालय डिंडोरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर समनापुर जनपद के कुकर्रामठ गांव में स्थित जिले के ऐतिहासिक ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार के पावन पर्व पर मंदिर में दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा,जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों भक्तों के द्वारा विधि विधान से भक्तों द्वारा पूजा पाठ की गई।गौरतलब है कि जिले के ऐतिहासिक ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से सैलानी पहुंचते हैं तथा आसपास के दर्जनों गांव के लोगों के लिए ऐतिहासिक मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां पूरे साल स्थानीय ग्रामीण दर्शन के लिए पहुंच कर धर्म लाभ लेते हैं।पुरातत्व विभाग द्वारा सैलानियों की जागरूकता के लिए मंदिर के इतिहास से जुड़ी जानकारियां सूचना पटल पर अंकित करवाई गई है, जिससे की मंदिर पहुंचे सैलानी सूचना पटल को पढ़कर मंदिर के इतिहास के बारे में सही जानकारियां सैलानियों को मिल सके, लेकिन फिलहाल अभी तक ऋणमुक्तेश्वर मंदिर मैं गाइड का काम करने वाला कोई कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है, जिससे कि मंदिर के इतिहास के बारे में सही जानकारियां सैलानियों को नहीं मिल पा रही। कल सोमवार को दिन भर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा, मंदिर पहुंचे भक्तों ने शिवजी में विधि विधान से पूजा पाठ के बाद शहद, शक्कर, दूध, घी, धतूरा, भांग चावल आदि चढ़ाकर मन्नते मांगी और शिव जी का जलाभिषेक किया। सावन सोमवार को जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों व शिव मंदिरों में विशेषकर लोगों की भीड़ देखी गई, कुकर्रामठ ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में जिला मुख्यालय के साथ-साथ जिलेभर से सैकड़ों की संख्या में सैलानियों ने पहुंच कर पूजा पाठ करते हुए सुख समृद्धि बनाए रखने के लिए शिव जी से प्रार्थना की गई।

– स्वान और बंजारे से जुड़ा है मंदिर का इतिहास-जनश्रुति के अनुसार मंदिर का अस्तित्व एक स्वान और बंजारे से जुड़ा हुआ है। जहां एक गांव में बंजारे के पास एक वफादार कुत्ता था, परिस्थितियां खराब होने के बाद बंजारे ने स्वान को एक साहूकार के पास गिरवी के तौर पर रख दिया और बंजारा बाहर रोजी-रोटी कमाने बाहर चला गया। समय गुजरते रहे एक दिन साहूकार के घर चोरी हो गई,साहूकार के पास जमा धन पूंजी को चोर चुरा ले गए, जिससे साहूकार काफी दुखी हुआ और काफी पछतावा करने लगा, यह सब देख वफादार स्वान को रहा ना गया और इशारा करते हुए स्वान ने चोरों के द्वारा छुपाए गए धन पूंजी, कीमती हीरे मोती के पास ले गया, जिसे वापस पाकर साहूकार बहुत ज्यादा खुश हुआ। साहूकार ने स्वान की वफादारी से प्रसन्न होकर कुत्ते को कर्ज मुक्त करने की सोची और उसके गले में संदेश वाली चिट्ठी को बांधकर गिरवी से मुक्त करके स्वान को वापस अपने मालिक बंजारा के पास जाने को कहकर कुत्ते को मुक्त कर दिया। स्वान अपने मालिक की तलाश में निकला ही था, तभी वापस बंजारा भी स्वान को वापस लेने साहूकार के पास आ रहा था, तभी स्वान को बिना इजाजत के आते देख गुस्से में बंजारे ने फर्सा निकालकर गले से काट दिया और मौत के घाट उतार दिया। वफादार स्वान की मौत के बाद बंजारे की नज़र कुत्ते की गले पर बंधी चिट्ठी पर पढ़ी, जिसे पढ़कर बंजारा पछतावा करने लगा और काफी पश्चाताप के बाद भी स्वान जिंदा नहीं हुआ,तब स्वान की याद में बंजारे ने ऋणमुक्तेश्वर मंदिर का निर्माण कराना बताया जा रहा है जाता है।

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