ई अटेंडेंस की अनिवार्यता केवल शिक्षकों पर ही क्यों..?
जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के संरक्षक दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि प्रदेश में 54 विभाग हैँ जिनके विभिन्न जिलों में हजारों कार्यालय एवं उपकार्यालय हैँ जिनमें लाखों अधिकारी -कर्मचारी कार्यरत हैँ। इतने विभागों में से केवल शिक्षा विभाग औऱ तो औऱ शिक्षा विभाग में भी केवल शिक्षक औऱ विधार्थियो के लिए ई अटेंडेंस आवश्यक एवं अनिवार्य की गयी है.. आखिर क्यों..? शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों तथा शेष बचे 53 विभागों के कर्मचारियों के लिए छूट क्यों दी गयी उन्हें किन कारणों से उपकृत किया गया। क्या ये ई अटेंडेंस की अनिवार्यता उनके लिए आवश्यक नहीं। एकमात्र शिक्षक ही प्रदेश के अधिकांश शासकीय कार्य जैसे चुनाव, बी एल ओ, जनगणना, मतगणना, साक्षरता, बी पी एल सर्वे.. इत्यादि अनेक कार्यों में अपनी सेवाएं देता है अर्थात सर्वाधिक कार्य लेने के बाद भी शिक्षक को ही मानसिक प्रताड़ित किया जाता रहा है नित नये आदेश, नियम, कार्य बतलाकर शिक्षक को डराया जा रहा है।
विशेषकर दूरस्थ पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में तो रहने खाने के समुचित संसाधन नहीं होने के कारण शिक्षक के पास अप डाउन करना उसकी मजबूरी है अब ऐसे तुगलकी आदेश उनका मानसिक संतुलन बिगाड़ रहे हैँ। ई अटेंडेंस की अनिवार्यता सभी विभागों के सभी अधिकारीयों एवं कर्मचारियों पर पूरे प्रदेश में लागू की जाये केवल शिक्षकों को टारगेट ना किया जाये। संघ के ऋषि पाठक,आसाराम झारिया,दुर्गेश खातरकर,नितिन तिवारी,रेनू बुनकर,जागृति मालवीय,आकाश भील, विश्वनाथ सिंह,गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे आदि ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री तथा प्रमुख सचिव महोदय और स्थानीय प्रशासन से उपरोक्त मांग पर चिंतन तथा विचार-विमर्श करके व्यवस्था में सकारात्मक सुधार लाने का अनुपम प्रयास करने को कहा है।



