भारत की आत्मा है श्री रामःआचार्य अभिनेष

जबलपुर दर्पण। प्रभु श्री राम के आदर्श एवं विचार भारतवर्ष की आत्मा में बसती हैं। उनका चरित्र एवं जीवन दर्शन भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। भारत में भगवान राम का अर्थ सिर्फ भगवान नहीं वह भारत के जन-जन का आदर्श और राष्ट्र की आत्मा है।वो सिर्फ हिंदुओं के देवता नहीं हैं वो एक विचार हैं। जो भारत के जन जन में व्याप्त है। भारत के संविधान में भी श्री राम के चित्र की अहमियत को वर्णित किया गया है। भारतीय पुराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री राम को सबसे उत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम पुरुष कहा गया है। उनका व्यक्तित्व आदर्श से परिपूर्ण था। राम के आदर्शमय जीवन से राम का व्यक्तित्व समझा जा सकता है।
उपरोक्त विचार शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनो आरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में आयोजित श्री राम कथा मानस पाठ के द्वितीय दिवस पर आचार्य अभिनेष जी ने रखे। उन्होंने कथा में बताया कि भगवान राम ने विषम परिस्थितियों में भी स्थिति पर नियंत्रण रख सफलता प्राप्त की उन्होंने हमेशा वेदों और मर्यादा का पालन किया। स्वयं के सुखों से समझौता कर उन्होंने न्याय और सत्य का साथ दिया। अभिनेष जी ने बताया कि जिस प्रकार समाज और परिवार के लिए श्री राम ने त्याग किया उसी प्रकार नशे को त्याग कर स्वयं, परिवार और समाज का कल्याण करना चाहिए। साथ ही कथा में उपस्थित मुख्य अतिथि श्री प्रदीप तिवारी जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक जी ने आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों को नशे के दुष्परिणामों के विषय में बताया।साथ ही श्री तिवारी जी ने नशा पीड़ितों को नशा छोड़ समाज के नैतिक मूल्यों को अपनाकर नशा मुक्त भारत बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया। श्री राम कथा मानस पाठ के द्वितीय दिवस पर आचार्य अभिनेष, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री प्रदीप तिवारी,अभिषेक, रूपेश पिंटू पटेल,मुकेश कुमार सेन,संतोष अहिरवार,चंचल गौतम,अजय सोनी अन्य सदस्य उपस्थित रहे।



